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कभी केजरीवाल के करीबी रहे राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती दूरियां सुर्खियों में। क्या दिल्ली विधानसभा चुनाव से जुड़े पुराने मतभेद अब पंजाब चुनाव पर असर डालेंगे? जानिए अंदर की कहानी और पार्टी के हालिया फैसलों का सच।
राघव चड्ढा ( Img: Google)
New Delhi: कभी आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद रणनीतिकार रहे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी के बीच दूरियां अब साफ दिखाई दे रही हैं। यह अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसकी जड़ें दिल्ली विधानसभा चुनाव तक जाती हैं। उस समय से ही पार्टी और राघव के बीच अंदरूनी मतभेद सामने आने लगे थे।
बीते गुरुवार को पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता का पद से हटा दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह कदम लंबी चर्चाओं और मतभेदों के बाद उठाया गया। पार्टी की सक्रिय राजनीति और प्रदर्शनों से दूरी, विदेश में लंबे समय तक रहने और पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करने जैसे कारणों ने यह संकेत दिए थे कि पार्टी नेतृत्व अब उन पर उतना भरोसा नहीं करता।
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सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है वो है लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राघव काफी समय विदेश में रहे।
दिल्ली में कथित शराब घोटाला मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं के बरी होने पर उन्होंने चुप्पी साध रखी।
पार्टी लाइन से हटकर राज्यसभा में मुद्दे उठाना और पार्टी नेतृत्व से बिना चर्चा के बयान देना भी विवाद का कारण बना।
राघव के बीजेपी के करीब होने की खबरों ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया।
कोर्ट के फैसले के बाद जब पार्टी के तमाम नेताओं ने बयान दिए, राघव की चुप्पी ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी में सक्रिय भूमिका अब नहीं रहेगी। सूत्रों का कहना है कि अब राघव का पार्टी कार्यों में सीधा योगदान नहीं होगा और वे स्वतंत्र राजनीतिक रुख अपनाने के संकेत दे रहे हैं।
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जानकारों का कहना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए यह दूरी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। पार्टी नेतृत्व ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर बीजेपी की ओर से राघव का समर्थन किया जा रहा है। अब यह देखना बाकी है कि राघव चड्ढा की अगली रणनीति क्या होगी और पंजाब समेत अन्य राज्यों में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।