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प्रतीकात्मक छवि (Source: AI Generated)
New Delhi: इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बेटियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार और तकनीकी संस्थानों द्वारा किए जा रहे प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। छह साल के लंबे सफर और सुनियोजित रणनीतियों के बाद, देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में छात्राओं के प्रवेश का आंकड़ा आखिरकार 20 फीसदी के पार पहुंच गया है।
आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रीमियम संस्थानों में जेंडर गैप को पाटने के लिए साल 2017-18 में बीटेक पाठ्यक्रमों में महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें आरक्षित करने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत शुरू किए गए विशेष प्रयासों का परिणाम यह है कि वर्तमान में आईआईटी में यह आंकड़ा 20.22 फीसदी और एनआईटी में 30 फीसदी तक दर्ज किया गया है।
सभी 23 आईआईटी संस्थानों के आंकड़ों और रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष तकनीकी संस्थानों के प्रति छात्राओं का रुझान लगातार मजबूत हुआ है। इस साल कुल 18,861 सीटों पर दाखिले हुए, जिनमें से 3,814 सीटों पर छात्राओं ने प्रवेश पाया है।
इस शैक्षणिक सत्र में बेटियों ने सबसे अधिक भरोसा आईआईटी तिरुपति और आईआईटी मद्रास पर दिखाया है। आईआईटी तिरुपति में सबसे अधिक 21.26 फीसदी और आईआईटी मद्रास में 21.12 फीसदी छात्राओं ने दाखिला लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है। अन्य प्रमुख संस्थानों में भी आंकड़े उत्साहजनक रहे हैं-
आईआईटी रुड़की: 20.63%
आईआईटी दिल्ली और इंदौर: 20.54% (दोनों)
आईआईटी कानपुर: 20.39%
आईआईटी गुवाहाटी: 20.35%
आईआईटी रोपड़: 20.20%
आईआईटी मंडी: 20.12%
आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी: 20.06%
आईआईटी जम्मू, जोधपुर, पलक्कड़ और गोवा: 20%
आईआईटी बॉम्बे: 19.77%
आईआईटी खड़गपुर: 19.31%
आईआईटी में प्रवेश की प्रक्रिया बेहद कठिन और कड़ी प्रतिस्पर्धा से भरी होती है। इस कठिन परीक्षा में 37 महिला उम्मीदवारों ने केवल आरक्षित कोटे तक सीमित न रहकर 'जेंडर-न्यूट्रल पूल' (सामान्य सीटों) के तहत अपनी जगह पक्की की है। इन 37 बेटियों ने अतिरिक्त सुपर न्यूमेरेरी सीटों की सहायता के बिना ओपन मेरिट के आधार पर यह सफलता हासिल की है, जो उनकी असाधारण शैक्षणिक क्षमता को दर्शाता है। कुल मिलाकर, आरक्षित और सामान्य कोटे को मिलाकर इस वर्ष 3,814 यानी 20.22 फीसदी बेटियों ने आईआईटी में प्रवेश लिया है।
प्रवेश आंकड़ों के साथ-साथ परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं के अनुपात में भी ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है। पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक बेटियों ने जेईई-एडवांस्ड परीक्षा पास की है। इस बार हर पांच सफल उम्मीदवारों में लगभग एक बेटी शामिल है, जिससे छात्राओं की सफलता दर पिछले साल के 21.7 प्रतिशत से बढ़कर 23.4 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष 43,112 बेटियों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से 40,562 छात्राएं परीक्षा में शामिल हुईं। इनमें से कुल 10,107 बेटियों ने सफलता हासिल की है। यानी परीक्षा देने वाली हर चार बेटियों में से लगभग एक ने इस कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया है। तकनीकी शिक्षा के गलियारों में बेटियों की यह बढ़ती भागीदारी देश के उज्ज्वल और समावेशी भविष्य की एक बेहतरीन तस्वीर पेश करती है।
Location : New Delhi
Published : 6 October 2026, 10:13 AM IST