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केंद्र सरकार ने कफ सिरप की बिक्री पर सख्ती बरतते हुए डॉक्टर की पर्ची को अनिवार्य कर दिया है। अब कफ सिरप मेडिकल दुकानों पर बिना पर्ची के नहीं बेचे जाएंगे और हर बिक्री का रिकॉर्ड रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा और दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना है।
प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: इंटरनेट)
New Delhi: भारत में कफ सिरप से होने वाली मौतों और दुष्प्रभावों के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब कफ सिरप की बिक्री पर कड़ा कदम उठाया है। अब कफ सिरप मेडिकल दुकानों पर बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं बिकेगा। इसके अलावा, हर प्रिस्क्रिप्शन का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। इस कदम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कफ सिरप का उपयोग डॉक्टर की निगरानी में ही हो और इसके साथ किसी भी तरह के दुष्प्रभाव से बचा जा सके।
सरकार की औषध परामर्श समिति ने कफ सिरप को उस शेड्यूल से हटा दिया है, जिसके तहत कफ सिरप को विशेष निगरानी और लाइसेंसिंग के नियमों से छूट प्राप्त थी। इसका मतलब है कि अब से कफ सिरप को डॉक्टर के परामर्श के बिना नहीं खरीदा जा सकेगा। यह निर्णय उन खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए लिया गया है, जो कफ सिरप में मिलाकर बच्चों की जान को खतरे में डाल सकते हैं।
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केंद्र सरकार का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कफ सिरप से जुड़ी यह नई नीति न केवल बच्चों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, सरकार का यह भी कहना है कि खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारी में लोग खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करें। इससे न केवल दवाओं के सही इस्तेमाल की संभावना बढ़ेगी, बल्कि गलत दवाओं से होने वाली समस्याओं को भी रोका जा सकेगा।
हाल ही में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग कफ सिरप का नशे के लिए इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा था, बल्कि समाज पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। कफ सिरप का नशे के लिए इस्तेमाल बढ़ता जा रहा था, जो एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका था।
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नए नियमों के तहत, अब कफ सिरप के गुणवत्ता जांच के कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे। मेडिकल दुकानों और वितरण केंद्रों को आदेश दिया गया है कि वे कफ सिरप की सभी शर्तों और मानकों का पालन करें। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी कफ सिरप उस शेड्यूल से बाहर न हो, जिसे सरकार ने मंजूरी दी है।