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कौन थे एम. विश्वेश्वरैया? (IMG: Gemini)
New Delhi: हर साल 15 सितंबर को भारत में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। यह दिन देश के महान इंजीनियर और राजनेता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के मौके पर मनाया जाता है। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके योगदान और देश के विकास में उनकी भूमिका को याद करते हुए यह दिन तकनीकी प्रतिभा और नवाचार के सम्मान का प्रतीक बन चुका है।
सर एम. विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनहल्ली में हुआ था। उन्होंने पुणे के साइंस कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद बॉम्बे प्रेसिडेंसी के लोक निर्माण विभाग में काम शुरू किया। अपनी काबिलियत और तकनीकी समझ के दम पर वे आगे चलकर मैसूर राज्य के चीफ इंजीनियर बने।
एम. विश्वेश्वरैया सिर्फ एक इंजीनियर नहीं थे, बल्कि पानी के बेहतर प्रबंधन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को लेकर उनकी सोच काफी आगे की थी। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कावेरी नदी पर बने कृष्णराज सागर बांध की योजना और इंजीनियरिंग में एम. विश्वेश्वरैया की अहम भूमिका रही। इस परियोजना ने मैसूर क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उस दौर में पानी का बेहतर प्रबंधन किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए बड़ी चुनौती था।
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साल 1908 में हैदराबाद में मूसी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। इसके बाद विश्वेश्वरैया को शहर की बाढ़ की समस्या का समाधान तलाशने के लिए बुलाया गया। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी और जलाशयों से जुड़ी योजनाओं पर काम किया। उनकी सलाह के आधार पर हैदराबाद में बाढ़ से बचाव की आधुनिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
विश्वेश्वरैया के इंजीनियरिंग योगदान में ऑटोमेटिक स्लुइस गेट सिस्टम का भी खास महत्व माना जाता है। इसका उद्देश्य जलाशयों में पानी के स्तर को नियंत्रित करना था। इस तरह की तकनीक ने बांधों और जल प्रबंधन परियोजनाओं में पानी के नियंत्रण को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद की। विश्वेश्वरैया की पहचान ऐसे इंजीनियर के तौर पर बनी, जो समस्या का समाधान सिर्फ तत्काल जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि लंबे समय को ध्यान में रखकर तलाशते थे।
विशाखापत्तनम बंदरगाह के सामने समुद्र की रेत जमा होने की समस्या एक बड़ी चुनौती थी। इस समस्या से निपटने के लिए भी एम. विश्वेश्वरैया से सलाह ली गई थी। यह उनके व्यापक इंजीनियरिंग अनुभव को दिखाता है कि उनकी विशेषज्ञता सिर्फ बांध और जल प्रबंधन तक सीमित नहीं थी, बल्कि बंदरगाह जैसी जटिल परियोजनाओं से जुड़ी समस्याओं में भी उनकी राय महत्वपूर्ण मानी जाती थी।
विश्वेश्वरैया का सपना सिर्फ मजबूत इंजीनियरिंग ढांचा तैयार करना नहीं था। वे भारत में औद्योगीकरण के भी बड़े समर्थक थे। 1912 से 1918 के बीच मैसूर के दीवान के रूप में उन्होंने उद्योग, शिक्षा, बैंकिंग और तकनीकी संस्थानों के विकास पर जोर दिया। मैसूर में कई औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थाओं के विकास को उनके कार्यकाल से जोड़ा जाता है। उनका मानना था कि किसी देश को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी शिक्षा, उद्योग और आधुनिक संस्थानों का विकास बेहद जरूरी है।
कौन थे सर एम. विश्वेश्वरैया? जिनकी याद में मनाया जाता है इंजीनियर्स डे
एम. विश्वेश्वरैया के जीवन से जुड़ा एक किस्सा बेहद मशहूर है। कहा जाता है कि एक बार वे ट्रेन से सफर कर रहे थे। ट्रेन में कुछ अंग्रेज यात्री एक भारतीय का मजाक उड़ा रहे थे। कुछ देर बाद उस भारतीय ने अचानक ट्रेन की चेन खींच दी। ट्रेन रुकने पर यात्री नाराज हो गए। तब उसने बताया कि उसे पटरियों में गड़बड़ी का अंदेशा हुआ है।
जब रेलवे कर्मचारियों ने आगे जाकर जांच की तो कुछ दूरी पर पटरी टूटी हुई मिली। बताया जाता है कि वह भारतीय कोई और नहीं, बल्कि सर एम. विश्वेश्वरैया थे। हालांकि, यह प्रसंग उनके जीवन से जुड़ी लोकप्रिय कहानियों में शामिल है, इसलिए इसे ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित घटना के बजाय प्रचलित किस्से के तौर पर देखना ज्यादा उचित है।
एम. विश्वेश्वरैया की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने इंजीनियरिंग को सिर्फ मशीनों और निर्माण तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पानी, शहरों, उद्योग, शिक्षा और तकनीकी संस्थानों को देश के विकास से जोड़कर देखा। 15 सितंबर को मनाया जाने वाला इंजीनियर्स डे इसी सोच और योगदान को याद करने का मौका है।
Location : New Delhi
Published : 15 September 2026, 1:01 PM IST
Topics : Bharat Ratna Engineers Day 2026 Engineers Day India M Visvesvaraya Mokshagundam Visvesvaraya
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