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बृजभूषण शरण सिंह (IMG: X)
New Delhi: दिल्ली की अदालत से राहत मिलने के बाद एक बार फिर बृजभूषण शरण सिंह चर्चा में हैं। लेकिन अदालत के फैसले से इतर उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका नाम लंबे समय से प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है। छह बार सांसद रहे बृजभूषण का राजनीतिक सफर गोंडा से शुरू हुआ और समय के साथ कैसरगंज, बलरामपुर समेत कई जिलों तक उनका प्रभाव माना जाने लगा। समर्थक उन्हें मजबूत जनाधार वाला नेता बताते हैं, जबकि विरोधियों ने समय-समय पर उन पर सवाल भी उठाए।
बृजभूषण शरण सिंह ने 1991 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर उत्तर प्रदेश की गोंडा लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने प्रतिद्वंद्वी आनंद सिंह को करीब 1.13 लाख वोटों के बड़े अंतर से हराकर राजनीतिक पहचान बना ली। इसके बाद उन्होंने 1999 में फिर गोंडा से जीत दर्ज की। इस चुनाव के बाद उनके राजनीतिक करियर ने लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कीं।
2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बलरामपुर सीट से उम्मीदवार बनाया। उस समय यह सीट पार्टी के लिए चुनौती मानी जा रही थी, लेकिन बृजभूषण ने यहां जीत दर्ज कर भाजपा को सफलता दिलाई। इसके बाद गोंडा, बलरामपुर, कैसरगंज और आसपास के क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत होती चली गई।
साल 2008 में लोकसभा में विश्वास मत के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोपों के बाद भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थामा और 2009 के लोकसभा चुनाव में कैसरगंज सीट से सपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बृजभूषण शरण सिंह दोबारा भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के टिकट पर उन्होंने 2014 और 2019 में कैसरगंज लोकसभा सीट से लगातार जीत हासिल की। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में विवादों के बीच भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया। उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया गया, जिन्होंने चुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी।
बृजभूषण शरण सिंह का परिवार भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं और गोंडा से लोकसभा सांसद भी चुनी गई थीं। उनके बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर विधानसभा सीट से विधायक हैं, जबकि बेटे करण भूषण सिंह वर्तमान में कैसरगंज से लोकसभा सांसद हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव गोंडा, कैसरगंज, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती और आसपास के क्षेत्रों में देखा जाता रहा है। स्थानीय राजनीति में उन्हें प्रभावशाली नेता माना जाता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह की छवि को लेकर अलग-अलग राय रही है। समर्थकों का एक वर्ग उन्हें जनता के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता और 'रॉबिनहुड' जैसी छवि वाला बताता है, जबकि आलोचक उनकी राजनीति पर सवाल उठाते रहे हैं।
बृजभूषण शरण सिंह क्षत्रिय समाज से आते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में इस समुदाय का अच्छा-खासा वोट बैंक मौजूद है, जिसने वर्षों तक उनकी राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने में भूमिका निभाई।
बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक सफर कई विवादों से भी जुड़ा रहा है। वे 1992 के अयोध्या ढांचा विध्वंस मामले में आरोपियों में शामिल थे। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 30 सितंबर 2020 को विशेष अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। इसके अलावा 1993 में उन पर दाऊद इब्राहिम गिरोह से जुड़े लोगों को संरक्षण देने सहित टाडा के तहत भी मामला दर्ज हुआ था। उन्हें तिहाड़ जेल भी भेजा गया था। बाद में अदालत से उन्हें इन मामलों में राहत मिली। अन्य मामलों में उनकी कानूनी स्थिति संबंधित अदालतों के रिकॉर्ड के अनुसार तय होती रही है।
बृजभूषण शरण सिंह छह बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। इनमें पांच बार भाजपा और एक बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर उन्होंने चुनाव जीता। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका नाम उन नेताओं में शामिल रहा है, जिन्होंने दशकों तक अपने क्षेत्र में मजबूत संगठनात्मक और व्यक्तिगत जनाधार बनाए रखा।
Location : New Delhi
Published : 3 August 2026, 4:58 PM IST