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एम.एफ. हुसैन फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज
New Delhi: 9 जून भारतीय कला जगत के लिए एक भावुक और ऐतिहासिक दिन है। इसी दिन आधुनिक भारतीय चित्रकला के महान शिल्पी मकबूल फिदा हुसैन (एम.एफ. हुसैन) ने दुनिया को अलविदा कहा था। अपनी अनूठी कला शैली, साहसिक प्रयोगों और रचनात्मक दृष्टि के दम पर उन्होंने भारतीय चित्रकला को नई पहचान दी और उसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया।
भारत का पिकासो
एम.एफ. हुसैन का नाम भारतीय आधुनिक कला के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्हें अक्सर भारत का पिकासो कहा जाता है। उन्होंने ऐसे समय में कला की दुनिया में कदम रखा, जब बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट्स की राष्ट्रवादी शैली का प्रभाव था। लेकिन हुसैन ने परंपरागत सीमाओं से बाहर निकलकर आधुनिक और प्रयोगधर्मी कला को अपनाया। उनकी यही सोच उन्हें समकालीन कलाकारों से अलग बनाती है।
देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच
1940 के दशक के अंत में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और जल्द ही उनकी कला देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच गई। वर्ष 1952 में स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में आयोजित उनकी प्रदर्शनी ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। इसके बाद दुनिया भर के कला प्रेमियों और समीक्षकों ने उनकी कृतियों को सराहा।
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संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान
भारतीय कला और संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा। वर्ष 1973 में पद्मभूषण, 1986 में राज्यसभा के लिए मनोनयन और 1991 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
आधुनिक सोच और रचनात्मक स्वतंत्रता के प्रतीक
एम.एफ. हुसैन केवल एक चित्रकार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय कला की आधुनिक सोच और रचनात्मक स्वतंत्रता के प्रतीक थे। उनकी बनाई पेंटिंग्स आज भी कला प्रेमियों को आकर्षित करती हैं और नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरित करती हैं। उनकी पुण्यतिथि पर देश और दुनिया का कला जगत इस महान कलाकार को श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनकी अमर विरासत को नमन करता है।
Location : New Delhi
Published : 8 June 2026, 2:47 PM IST