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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
New Delhi: अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कमजोर निर्यात और घटते प्रेषण के कारण भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) वित्त वर्ष 2026-27 में काफी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सीधा असर देश के बाहरी आर्थिक संतुलन पर पड़ेगा और वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.5 प्रतिशत से 2.4 प्रतिशत के बीच रह सकता है। वहीं क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026 में सीएडी 0.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में 2.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रेंट क्रूड का अनुमान 82-87 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 90-95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से तेल और गैस उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इससे भारत को न केवल महंगे तेल का सामना करना पड़ेगा, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाले प्रेषण में भी कमी आ सकती है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है।
आर्थिक सलाहकार के अनुसार सीएडी वित्त वर्ष 2026 में 1 प्रतिशत से कम से बढ़कर 2 प्रतिशत से अधिक हो सकता है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि यह 1.5 से 2 प्रतिशत के बीच रह सकता है। उन्होंने कहा कि सेवाओं के निर्यात, खासकर आईटी सेक्टर से कुछ राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि असली जोखिम चालू खाते से अधिक पूंजी खाते पर है। विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव और एफपीआई प्रवाह में कमी भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। येस बैंक के अर्थशास्त्री इंद्रनील पाल ने कहा कि शुद्ध एफडीआई प्रवाह कमजोर होने से आर्थिक असंतुलन बढ़ सकता है।
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एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के अनुसार ब्रेंट क्रूड में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से सीएडी में 0.45 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। केनरा बैंक के अनुसार अगर तेल 100-110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो चालू खाता घाटा 1.8 से 1.9 प्रतिशत तक जा सकता है।
विशेषज्ञों ने सोने के बढ़ते आयात को भी चिंता का कारण बताया है। भारत का सोना आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 58.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे व्यापार घाटा और बढ़ रहा है।
Location : New Delhi
Published : 12 May 2026, 9:59 AM IST