CJP Protest: स्वतंत्र भारद्वाज की बढ़ीं मुश्किलें, POCSO समेत 5 धाराओं में नई FIR; जंतर-मंतर कांड पर बड़बोलापन कैसे बना आत्मघाती?

जंतर-मंतर पर मारपीट के मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। नाबालिग से जुड़ी शिकायत के आधार पर उसके खिलाफ POCSO, BNS और IT एक्ट की पांच धाराओं में नई FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 6 September 2026, 1:25 PM IST
google-preferred

New Delhi: जंतर-मंतर पर हुई मारपीट के मामले से चर्चा में आए स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। उसके खिलाफ नाबालिग से जुड़ी शिकायत के आधार पर POCSO एक्ट, भारतीय न्याय संहिता यानी BNS और IT एक्ट की धाराओं में नई FIR दर्ज की गई है। मामले में नाबालिग से जुड़े यौन उत्पीड़न, महिला का पीछा करने, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने, आपराधिक धमकी देने और ऑनलाइन अश्लील सामग्री से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि नई FIR में लगाई गई पांचों धाराएं जमानती बताई गई हैं। ऐसे में इन धाराओं के आधार पर तुरंत गिरफ्तारी करना कानूनी तौर पर अनिवार्य नहीं है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मामला खत्म हो गया। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर सकती है और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

गिरफ्तार हो चुका है स्वतंत्र

स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सबसे पहले जंतर-मंतर पर हुए मारपीट के मामले के बाद चर्चा में आया था। प्रदर्शन के दौरान संजय आजाद के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगा था। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर इस घटना को लेकर बात करते हुए नजर आया। वीडियो में संजय कुमार के सिर पर चोट लगने और 60 टांके लगाए जाने का दावा भी किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर से सुर्खियों में आ गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। इस मामले की जांच के बीच अब उसके खिलाफ एक और FIR दर्ज होने से विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।

चंद्रशेखर पीड़ित परिवार के साथ पहुंचे थे थाने

नाबालिग से जुड़ी नई शिकायत के बाद मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार की बेटी के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले में नई FIR दर्ज की। FIR में BNS की तीन धाराएं, POCSO एक्ट की एक धारा और IT एक्ट की एक धारा लगाई गई है। अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

‘यदि मैं न मारता तो भीड़ मुझे मार डालती’; स्वतंत्र भारद्वाज के बयान पर क्यों मचा बवाल? CJP फिर प्रदर्शन की राह पर

धारा 78 BNS में पीछा करने का आरोप

नई FIR में BNS की धारा 78 लगाई गई है। यह धारा किसी महिला का पीछा करने या उसकी गतिविधियों पर नजर रखने जैसे आरोपों से संबंधित है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दोष सिद्ध होने पर इसमें सजा का प्रावधान है और यह जमानती धारा है। इस मामले में पुलिस यह जांच करेगी कि शिकायत में लगाए गए पीछा करने के आरोपों से जुड़े कोई सबूत मौजूद हैं या नहीं। इसके लिए पुलिस संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को भी देख सकती है।

धारा 79 BNS में महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप

FIR में BNS की धारा 79 भी लगाई गई है। यह धारा किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य से जुड़ी है। शिकायत में इस तरह के आरोप लगाए गए हैं। यह भी जमानती धारा है। मामले में पुलिस शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की जांच करेगी और आरोपों की पुष्टि के लिए जरूरी साक्ष्य जुटाएगी।

धारा 351 BNS यानी आपराधिक धमकी का मामला

नई FIR में BNS की धारा 351 भी शामिल है। यह धारा आपराधिक धमकी से संबंधित है। यानी किसी व्यक्ति को डराने या धमकाने के आरोप इस प्रावधान के दायरे में आते हैं। इस मामले में भी पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित धमकी किस परिस्थिति में दी गई, किस माध्यम से दी गई और क्या उसके समर्थन में कोई रिकॉर्ड या अन्य सबूत मौजूद है।

POCSO की धारा 12 ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

FIR में POCSO एक्ट की धारा 12 भी लगाई गई है। यह बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में लागू होती है। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए पुलिस को जांच के दौरान POCSO कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। यह धारा भी जमानती है। हालांकि POCSO से जुड़ा मामला होने के कारण जांच की प्रकृति संवेदनशील होती है और नाबालिग की पहचान और उसकी निजता की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।

Nishu Azad Case: हेट स्पीच, आदतन अपराधी और SC-ST एक्ट की धाराएं जोड़ने पर डटी कांग्रेस

IT एक्ट की धारा 67 भी FIR में शामिल

नई FIR में IT एक्ट की धारा 67 भी लगाई गई है। यह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित प्रावधान है। इसका मतलब है कि पुलिस अब कथित ऑनलाइन गतिविधियों की भी जांच करेगी। सोशल मीडिया पोस्ट, मैसेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या अन्य डिजिटल सामग्री अगर शिकायत से संबंधित पाई जाती है तो उसकी भी पड़ताल की जा सकती है।

चिराग पासवान ने भी जताई थी आपत्ति

इस पूरे विवाद के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आए थे। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी सार्वजनिक तौर पर यह कहा था कि स्वतंत्र ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने उसके खिलाफ शिकायत करने की बात कही थी।

अब पुलिस की जांच पर टिकी नजर

नई FIR दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने अब कई पहलुओं की जांच की चुनौती है। एक तरफ शिकायत में लगाए गए नाबालिग से जुड़े आरोप हैं, तो दूसरी तरफ कथित पीछा करने, धमकी और ऑनलाइन गतिविधियों से संबंधित आरोपों की भी जांच होनी है। फिलहाल FIR में लगी धाराएं जमानती हैं, इसलिए इनके आधार पर तत्काल गिरफ्तारी की कानूनी बाध्यता नहीं है। हालांकि जांच के दौरान यदि पुलिस को कोई ऐसा तथ्य या साक्ष्य मिलता है, जिससे किसी अन्य गंभीर अपराध का पता चलता है, तो आगे की कानूनी कार्रवाई उसी के अनुसार हो सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  6 September 2026, 1:25 PM IST

Advertisement