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आजाद भारत में 1500 रुपये से शुरू हुआ टैक्स फ्री इनकम का सफर अब 12 लाख रुपये तक पहुंच गया है। जानिए भारत में आयकर व्यवस्था कैसे बदली।
भारत का केंद्रीय बजट
New Delhi: भारत में इनकम टैक्स का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प भी। आज जब सालाना 12 लाख रुपये तक की आमदनी पर टैक्स नहीं देना पड़ता, तब यह जानना जरूरी हो जाता है कि आजाद भारत की शुरुआत में टैक्स फ्री इनकम की सीमा सिर्फ 1500 रुपये थी। वक्त के साथ सरकारें बदलीं, नीतियां बदलीं और आम आदमी पर टैक्स का बोझ भी घटता-बढ़ता रहा।
आजाद भारत का पहला बजट
आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसे देश के पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी ने संसद में रखा था। हालांकि यह बजट कम और भारतीय अर्थव्यवस्था की समीक्षा ज्यादा था। उस दौर में सरकार की प्राथमिकता देश को पटरी पर लाने की थी और 1500 रुपये तक की सालाना आमदनी को टैक्स फ्री रखा गया था।
टैक्स सिस्टम में होते रहे प्रयोग
1955 में सरकार ने आबादी बढ़ाने के मकसद से शादीशुदा और कुंवारों के लिए अलग-अलग टैक्स फ्री इनकम का प्रावधान किया। शादीशुदा लोगों को 2000 रुपये तक की आमदनी पर टैक्स नहीं देना पड़ता था, जबकि कुंवारों के लिए यह सीमा 1000 रुपये तय की गई थी। इसके बाद 1958 में भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने बच्चों की संख्या के आधार पर टैक्स में छूट दी।
जब टैक्स लगभग पूरी कमाई निगल गया
भारत में आयकर की सबसे ऊंची दर 1973-74 के दौरान देखने को मिली। उस समय अधिकतम टैक्स दर 85 फीसदी थी और सरचार्ज मिलाकर यह 97.75 फीसदी तक पहुंच गई थी। यानी 100 रुपये कमाने पर सिर्फ 2.25 रुपये ही व्यक्ति की जेब में बचते थे। बाद के वर्षों में सरकारों ने इस भारी टैक्स बोझ को कम करने के लिए सुधार किए।
नई टैक्स रिजीम का दौर
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2020 से नई टैक्स रिजीम लागू की। इसमें टैक्स स्लैब तो बदले गए, लेकिन ज्यादातर छूट और डिडक्शन खत्म कर दिए गए। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसे डिफॉल्ट टैक्स रिजीम बना दिया गया।
बजट 2025-26 का बड़ा एलान
केंद्रीय बजट 2025-26 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा ऐलान करते हुए नई टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की आमदनी को टैक्स फ्री कर दिया। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद नौकरीपेशा व्यक्ति की 12 लाख 75 हजार रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं बनता। यानी करीब एक लाख रुपये महीना कमाने वाले व्यक्ति को अब आयकर नहीं देना होगा।