पक्षियों की आवाज पर बड़ा शोध: साथी को आकर्षित और संवाद के लिए खास आवाज निकालते हैं विशेष नभचर

पक्षियों की मधुर आवाज हमेशा लोगों को आकर्षित करती रही है। अब वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन में पता चला है कि पक्षियों के गीत संगीत के सात नहीं, बल्कि आठ मूल ध्वनियों पर आधारित होते हैं। 3,160 से अधिक प्रजातियों के 1.16 लाख से ज्यादा ऑडियो रिकॉर्ड का विश्लेषण कर यह अहम जानकारी सामने आई है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 8 August 2026, 1:10 PM IST
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New Delhi: वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के पक्षियों की आवाजों पर बड़ा अध्ययन किया है। इस शोध में 3,160 से अधिक प्रजातियों के 1.16 लाख से ज्यादा गानों का डिजिटल विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, पक्षियों के गीत मुख्य रूप से आठ प्रकार की मूल ध्वनियों पर आधारित होते हैं। यह शोध प्रतिष्ठित साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

इस अध्ययन में 3,000 से अधिक सॉन्गबर्ड (पैसिरीन) प्रजातियों को शामिल किया गया। ये पक्षी दुनिया की कुल पक्षी प्रजातियों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हैं। शोध से पता चला कि इनकी आवाजों का एक निश्चित पैटर्न होता है, जो पीढ़ियों से आगे बढ़ता आ रहा है।

करोड़ों साल पुरानी हैं ये ध्वनियां

वैज्ञानिकों के अनुसार, पक्षियों की ये मूल ध्वनियां करोड़ों वर्ष पहले उनके शुरुआती पूर्वजों के समय विकसित हुई थीं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लगभग 82 प्रतिशत पैसिरीन पक्षियों में ये ध्वनियां समय के साथ सुरक्षित बनी रहीं और नई पीढ़ियों तक पहुंचती गईं।

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आठ मूल ध्वनियों में क्या शामिल है?

शोध के मुताबिक, इन आठ मूल ध्वनियों में तीन प्रकार की सीटियां और तीन प्रकार के ट्रिल्स शामिल हैं। ट्रिल्स ऐसी आवाजें होती हैं, जो बहुत तेजी से एक जैसी ध्वनि को दोहराती हैं। बाकी ध्वनियां भी अलग-अलग प्रकार की लय और स्वर से जुड़ी होती हैं, जिनसे पक्षी अपने साथी से संवाद करते हैं।

पर्यावरण के अनुसार बदलती है पक्षियों की बोली

अध्ययन में यह भी सामने आया कि पक्षियों की आवाज उनके रहने के स्थान पर निर्भर करती है। घने और नमी वाले जंगलों में रहने वाले पक्षी सरल और सीटी जैसी आवाजें निकालते हैं, ताकि उनकी आवाज दूर तक पहुंच सके। वहीं खुले और शीतोष्ण क्षेत्रों में रहने वाले पक्षी अधिक तेज और जटिल ध्वनियां निकालते हैं, जो साथी को आकर्षित करने और आपसी संवाद के लिए उपयुक्त होती हैं।

पर्यावरण बदलाव का भी दिखा असर

वैज्ञानिकों ने पाया कि बदलते पर्यावरण का असर पक्षियों की बोलियों पर भी पड़ रहा है। मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों में बदलाव के कारण उनकी आवाज और संचार के तरीके भी धीरे-धीरे बदल रहे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे भविष्य में पक्षियों के व्यवहार और संरक्षण को समझने में मदद मिलेगी।

Location :  New Delhi

Published :  8 August 2026, 12:51 PM IST

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