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पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में NJAC को रद्द किए जाने को जल्दबाजी बताया और न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता व कॉलेजियम सुधारों पर जोर दिया।
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और देश के 50वें CJI रहे डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़
Jaipur: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और देश के 50वें CJI रहे डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़ ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग यानी NJAC को रद्द किए जाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोलते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक संशोधन के ज़रिए बनाए गए NJAC को कुछ समय तक काम करने देना चाहिए था, ताकि उसके प्रदर्शन का सही आकलन हो पाता। उनका मानना है कि इसे पूरी तरह खारिज कर देना एक तरह की जल्दबाजी थी, जिसने न्यायिक नियुक्तियों पर व्यापक सुधार की संभावनाओं को सीमित कर दिया।
न्यायिक शक्ति के असर पर खुलकर बोले पूर्व CJI
जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने संबोधन में न्यायपालिका की शक्ति और उसके दूरगामी प्रभावों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अदालतें अपने फैसलों के ज़रिए न केवल वर्तमान राजनीति और समाज को प्रभावित करती हैं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करती हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि समाज की यह जानने में गहरी और वैध रुचि हो कि न्यायाधीशों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से होती है और उसमें किन मानकों का पालन किया जाता है।
न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत
पूर्व CJI ने साफ कहा कि न्यायिक नियुक्तियों में सुधार दो स्तरों पर होना चाहिए। पहला, पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में, लेकिन बिना प्रक्रिया को सार्वजनिक तमाशा बनाए। उन्होंने सुझाव दिया कि चयन के लिए अपनाए गए मापदंडों को सार्वजनिक किया जाए, जिन उम्मीदवारों पर विचार किया गया है उनके समूह की जानकारी दी जाए और आखिरकार किस आधार पर किसी नाम को चुना गया, यह भी स्पष्ट किया जाए। इससे न्यायपालिका में भरोसा मजबूत होगा।
कॉलेजियम सिस्टम में संरचनात्मक बदलाव का सुझाव
दूसरे स्तर पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कॉलेजियम सिस्टम की संरचना पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम के सदस्य अक्सर बदलते रहते हैं, जबकि न्यायिक नियुक्तियाँ दशकों के लिए होती हैं। यह असंतुलन निरंतरता और संस्थागत स्थिरता को प्रभावित करता है। इसे सुधारने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि कॉलेजियम में समाज के कुछ स्वतंत्र और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी शामिल किया जा सकता है, जिनका सार्वजनिक जीवन में मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड हो।
राष्ट्रीय स्तर पर बहस की ज़रूरत
अपने संबोधन के अंत में पूर्व CJI ने कहा कि न्यायिक नियुक्तियों को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय चर्चा की जरूरत है। पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद और सुधार बेहद जरूरी हैं।