14 फैसलों पर उठे सवाल, अब कोर्ट में होगी सुनवाई! महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हलचल

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मामला अब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। चुनाव आयोग के 14 प्रशासनिक फैसलों से लेकर वोटर लिस्ट, फॉर्म-6 और डेटाबेस में बदलाव तक कई सवाल उठाए गए हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 25 September 2026, 11:32 AM IST

Mumbai: महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही बहस अब अदालत तक पहुंच गई है। चुनाव आयोग के पिछले करीब 10 महीनों के दौरान लिए गए 14 प्रशासनिक फैसलों को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि इन फैसलों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। मामले को 28 सितंबर को संबंधित पीठ के सामने मेंशन किए जाने की संभावना है।

14 फैसलों को लेकर क्या है विवाद?

कोल्हापुर पीठ में वकील असीम सरोदे के जरिए दाखिल याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों और कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका के मुताबिक, इन फैसलों का संबंध मतदाता पंजीकरण, वोटर लिस्ट तैयार करने, मतदाता सूची के डेटाबेस और चुनाव पंजीकरण अधिकारियों की कार्यप्रणाली से है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन मामलों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी।

फॉर्म-6 से लेकर वोटर डेटाबेस तक का मुद्दा

याचिका में कई प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए हैं। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाताओं के नाम हटाने और बाद में बहाल करने से जुड़े आदेश और SIR के दौरान नाम बहाल करने के फैसलों के खिलाफ अपील जैसे मामले शामिल हैं।

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इसके अलावा मतदाता सूची के डेटाबेस और आईटी सिस्टम में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि कुछ फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। हालांकि, इन दावों पर अदालत की ओर से अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

SIR रोकने और हटाए गए नाम बहाल करने की मांग

याचिका में महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने के साथ-साथ इसके दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा उन राज्यों में विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग रखी गई है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई और कानूनी प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची तैयार होने के बाद ही आगे की चुनावी प्रक्रिया होनी चाहिए।
पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने की मांग भी की गई है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।

दूसरी याचिका में पारदर्शिता पर जोर

महाराष्ट्र की SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की मुख्य पीठ के सामने एक दूसरी याचिका भी दाखिल की गई है। इसे वकील हितेंद्र गांधी के जरिए दाखिल किया गया है। इस याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता SIR रोकने या चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग मतदाता की चुनावी पात्रता की जांच कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फैसला करने का अधिकार उसके पास नहीं है।

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याचिका में SIR शुरू करने के आदेश और उसके पीछे बताए गए कारणों को सार्वजनिक करने, प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने और पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटने से रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय करने की मांग की गई है।

BLO से जुड़े आरोपों ने भी बढ़ाए सवाल

दूसरी याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि आयोग के निर्देशों के बावजूद कुछ बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO SIR फॉर्म लेते समय लोगों से सहायक दस्तावेज मांग रहे हैं। याचिका में मांग की गई है कि पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के जारी निर्देशों के अनुसार ही हो। दोनों याचिकाओं में मतदाता सूची, SIR के दौरान नाम हटाने और चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग मुद्दे उठाए गए हैं। दोनों मामलों को 28 सितंबर को संबंधित पीठों के सामने मेंशन किए जाने की संभावना है। 

Location :  Mumbai

Published :  25 September 2026, 11:32 AM IST