
स्मार्टफोन से दूरी (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: आज के दौर में स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक अधिकांश लोग मोबाइल स्क्रीन के सामने काफी समय बिताते हैं। सोशल मीडिया, वीडियो, गेम्स और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन लोगों को घंटों फोन से जोड़े रखते हैं। हालांकि, हाल के दिनों में कुछ लोगों ने एक महीने तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल बंद करके अपने अनुभव साझा किए हैं। उनके अनुसार, इस डिजिटल ब्रेक से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्टफोन का लगातार इस्तेमाल दिमाग को हर समय नई जानकारियों और नोटिफिकेशन के संपर्क में रखता है। इससे ध्यान भटकना और किसी एक काम पर लंबे समय तक फोकस बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
एक महीने तक स्मार्टफोन से दूरी बनाने वाले लोगों का कहना है कि इस दौरान उनका ध्यान पहले की तुलना में बेहतर हुआ। वे अपने काम पर अधिक एकाग्रता के साथ ध्यान दे पाए और रोजमर्रा के कार्यों में उनकी उत्पादकता भी बढ़ी। लगातार स्क्रीन देखने की आदत कम होने से मानसिक शांति का अनुभव भी हुआ।
आजकल बड़ी संख्या में लोग रात को सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। इससे आंखों और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिसका असर नींद पर पड़ सकता है।
जिन लोगों ने एक महीने तक स्मार्टफोन से दूरी बनाई, उन्होंने बताया कि उनकी नींद पहले से बेहतर होने लगी। वे जल्दी सोने लगे और सुबह अधिक तरोताजा महसूस करने लगे। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि स्क्रीन टाइम कम करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और शरीर को बेहतर आराम मिलता है।
जब फोन हर समय हाथ में नहीं होता तो लोग अपने आसपास की दुनिया पर अधिक ध्यान देने लगते हैं। डिजिटल ब्रेक लेने वाले कई लोगों ने महसूस किया कि उन्होंने परिवार और दोस्तों के साथ पहले से अधिक समय बिताया।
कुछ लोगों ने नए दोस्त भी बनाए और आमने-सामने बातचीत करने में अधिक रुचि दिखाई। इसके अलावा, फोन की जगह किताबें पढ़ना, टहलना या किसी पसंदीदा शौक को समय देना आसान हो गया। इससे मानसिक संतुष्टि और खुशी का स्तर भी बढ़ा।
स्मार्टफोन की सबसे बड़ी आदतों में से एक है हर खाली समय में स्क्रीन देखने लगना। चाहे बस का इंतजार हो, किसी लाइन में खड़ा होना हो या कुछ मिनटों की फुर्सत ही क्यों न हो, लोग अक्सर फोन निकाल लेते हैं।
एक महीने तक स्मार्टफोन से दूर रहने वाले लोगों ने महसूस किया कि धीरे-धीरे यह आदत कम होने लगी। वे बिना फोन के भी सहज महसूस करने लगे और अपने विचारों के साथ समय बिताने लगे। इससे दिमाग को आराम मिला और मानसिक संतुलन बेहतर हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति के लिए एक महीने का डिजिटल ब्रेक लेना जरूरी नहीं है, लेकिन स्क्रीन टाइम कम करना और बेवजह सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग से बचना निश्चित रूप से फायदेमंद हो सकता है। दिन के कुछ घंटे फोन से दूर रहकर भी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। यह अनुभव लोगों को यह समझने में मदद करता है कि तकनीक का संतुलित और जिम्मेदार इस्तेमाल ही बेहतर जीवनशैली की कुंजी है।
Location : New Delhi
Published : 6 June 2026, 12:56 PM IST