
प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
New Delhi: एक अच्छी और गहरी नींद हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की नींव होती है। लेकिन सोचिए, अगर आप दिनभर की थकान के बाद सोने जाएं और पास में सो रहा आपका पार्टनर जोर-जोर से खर्राटे लेने लगे? यह स्थिति न सिर्फ चिड़चिड़ाहट पैदा करती है, बल्कि धीरे-धीरे आपकी खुद की सेहत को भी गंभीर नुकसान पहुंचाने लगती है। अक्सर लोग खर्राटों को एक सामान्य आदत या मजाक समझकर टाल देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या 'साइलेंट पॉइजन' की तरह काम करती है।
जब आपका पार्टनर रातभर तेज खर्राटे लेता है, तो आपकी नींद बार-बार टूटती है। इसे मेडिकल भाषा में 'पैसिव स्लीप डिस्टर्बेंस' कहते हैं। नींद का यह अधूरापन सुबह उठते ही थकान, सिरदर्द और भारीपन के रूप में सामने आता है। लगातार कई दिनों तक नींद पूरी न होने से व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, तनाव और काम में ध्यान न लगने जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। इतना ही नहीं, लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने से हाई ब्लड प्रेशर और इम्युनिटी कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
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मौसम बदलने, नाक बंद होने, वजन बढ़ने या गलत पोजिशन में सोने से कभी-कभार खर्राटे आना सामान्य है। लेकिन अगर खर्राटों की आवाज बहुत तेज है और यह रोज की कहानी बन चुकी है, तो सावधान हो जाने की जरूरत है। यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
इस बीमारी में सोते समय सांस की नली में रुकावट आती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है और व्यक्ति हांफते हुए या घुटन के अहसास के साथ अचानक जाग जाता है।
रातभर खर्राटों के शोर के कारण जब दोनों पार्टनर ठीक से सो नहीं पाते, तो इसका सीधा असर उनके रिश्ते पर भी पड़ता है। दिनभर की सुस्ती और थकान के कारण छोटी-छोटी बातों पर बहस और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। कई बार कपल्स को मजबूरन अलग-अलग कमरों में सोना पड़ता है, जिससे आपसी जुड़ाव कम होने लगता है।
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अगर आपके पार्टनर को भी यह समस्या है, तो इसे केवल आदत मानने की भूल न करें। सोने की पोजिशन बदलें, वजन नियंत्रित रखें और शराब या स्मोकिंग से दूरी बनाएं। लेकिन अगर इसके बावजूद तेज खर्राटे और सोते समय सांस रुकने जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देर किए किसी स्लीप स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लें।
Location : New Delhi
Published : 16 September 2026, 2:56 PM IST