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मौनी अमावस्या का दिन हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस दिन साधु-संत और श्रद्धालु गंगा में स्नान करते हैं। मौन व्रत का रहस्य और इसका महत्व क्या है? क्यों साधु-संत इस दिन पूरी तरह चुप रहते हैं और कौन से नियम अपनाते हैं, पढ़िए पूरी कहानी।
साधुओं का मौन व्रत का रहस्य (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Prayagraj: माघ मेला का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्नान 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर होगा। यह दिन हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस दिन साधु-संत और श्रद्धालु गंगा में स्नान करते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा से हुई थी और यह महाशिवरात्रि, 15 फरवरी 2026 को समाप्त होगा। माघ मेले के दौरान विभिन्न तिथियों पर स्नान का महत्व होता है, लेकिन मौनी अमावस्या का स्नान विशेष रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन साधु-संत और अधिकांश लोग मौन व्रत का पालन करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य मन और वाणी पर नियंत्रण रखना और मानसिक शांति प्राप्त करना है। साधु-संत मानते हैं कि मौन व्रत से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार बढ़ता है और व्यक्ति की चेतना शुद्ध होती है। मौन का पालन साधु-संतों को गहन आध्यात्मिक एकाग्रता में मदद करता है, जिससे मन और वाणी दोनों शुद्ध रहते हैं और आंतरिक शक्ति का संरक्षण होता है।
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धार्मिक गुरुओं के अनुसार, मौन साधना व्यक्ति को अपने अंदर की आत्मा और परमात्मा से जोड़ने में सहायक होती है। मौनी अमावस्या के दौरान यह अभ्यास विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसे बोलने से परहेज के रूप में नहीं, बल्कि मन और चेतना को एकाग्र करने की साधना के रूप में अपनाया जाता है। मौन को केवल त्याग या अलगाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह आत्म-संयम और ध्यान का एक माध्यम है।
हिंदू ज्योतिष के अनुसार, मन का कारक चंद्रदेव माने जाते हैं। अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता, जिससे मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मौन व्रत रखने से मन शांत होता है और जीवन में ईश्वर की स्मृति में ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। इसके साथ ही, यह व्रत मन और वाणी दोनों को शुद्ध करता है और व्यक्ति की आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करता है।
यदि आप भी 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने का संकल्प ले रहे हैं, तो इसके कुछ प्रमुख नियमों का पालन करना आवश्यक है-
क्या करें:
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
मौन व्रत का संकल्प लें और देवी-देवताओं की पूजा करें।
ध्यान और साधना में समय बिताएं।
मानसिक शांति बनाए रखें और सकारात्मक विचारों पर ध्यान दें।
क्या न करें:
दिन भर किसी से बातचीत न करें।
गलत विचारों और नकारात्मक भावनाओं से खुद को प्रभावित न होने दें।
व्रत के दौरान अनुचित भोजन या व्यवहार से दूर रहें।
मौन व्रत को अमावस्या खत्म होने से पहले न तोड़ें।
मौन केवल बोलने से परहेज नहीं है, बल्कि यह चेतना और ध्यान का अभ्यास है। अगर आप इस दिन सही तरीके से मौन व्रत करें, तो जीवन में मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
नोट: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। किसी भी व्रत या उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या ज्योतिष से परामर्श अवश्य लें।