
कब्ज की समस्या (Source: Pinterest)
New Delhi: अगर आपको तीन दिन या उससे अधिक समय से शौच के लिए जोर लगाना पड़ रहा है, पेट भारी महसूस हो रहा है या ब्लोटिंग हो रही है, तो यह गंभीर कब्ज का संकेत है। लगातार कब्ज रहने से न केवल पाचन तंत्र सुस्त हो जाता है, बल्कि पूरे दिन बेचैनी और आलस्य बना रहता है। इस स्थिति से निपटने के लिए महंगे इलाज या दवाइयों की जगह सही खान-पान और प्राकृतिक नुस्खों को अपनाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
सूखा आलूबुखारा यानी 'प्रून्स' कब्ज की समस्या में किसी रामबाण से कम नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी अध्ययनों के अनुसार, प्रून्स में प्रचुर मात्रा में डाइट्री फाइबर के साथ-साथ 'सोर्बिटोल' नाम का शुगर अल्कोहल पाया जाता है। सोर्बिटोल का प्राकृतिक लैक्सेटिव प्रभाव आंतों में पानी खींचने का काम करता है, जिससे सख्त मल नरम हो जाता है और पेट आसानी से साफ होता है। रोजाना लगभग 50 ग्राम प्रून्स का सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।
कब्ज की सबसे बड़ी वजह शरीर में डिहाइड्रेशन या पानी की कमी होती है। जब आंतों को पर्याप्त नमी नहीं मिलती, तो मल कठोर हो जाता है। इसलिए प्रून्स या फाइबर युक्त आहार के साथ दिनभर खूब पानी पीना जरूरी है। कुछ मामलों में स्पार्कलिंग वॉटर (सोडा वॉटर) भी पाचन तंत्र को उत्तेजित कर राहत पहुंचाता है, हालांकि गैस की समस्या वाले लोगों को इसे संभलकर पीना चाहिए।
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अपनी डाइट में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर शामिल करें। हरी सब्जियां, ताजे फल, दालें, नट्स, बीन्स और इसबगोल (साइलियम हस्क) इसके बेहतरीन स्रोत हैं। ध्यान रखें कि एकदम से बहुत ज्यादा फाइबर खाने से गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है, इसलिए इसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।
दिनभर बैठे रहने की आदत भी आंतों की गतिशीलता को धीमा कर देती है। रोजाना 20-30 मिनट की वॉक, हल्की एक्सरसाइज या योग करने से पाचन अंग सक्रिय होते हैं। इसके अलावा, सीमित मात्रा में कॉफी का सेवन भी कुछ लोगों में आंतों की मांसपेशियों को सक्रिय कर पेट साफ करने में मदद करता है।
Location : New Delhi
Published : 4 September 2026, 3:30 PM IST
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