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प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
Patna: NEET री-एग्जाम से पहले बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने परीक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि परीक्षा नजदीक आते ही साइबर अपराधी और असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे लोग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फोन कॉल के माध्यम से छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं।
EOU ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी को ही सही मानें।
एडवाइजरी में कहा गया है कि कुछ लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने या पेपर लीक होने का दावा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में अक्सर छात्रों से मोटी रकम मांगी जाती है। कई बार फर्जी प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी भेजकर अभ्यर्थियों को ठगी का शिकार बनाया जाता है। EOU ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अवैध जानकारी खरीदने या बेचने की कोशिश कानूनी अपराध है।
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छात्रों को सलाह दी गई है कि किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आकर पैसे ट्रांसफर न करें और न ही अपनी निजी जानकारी साझा करें।
आर्थिक अपराध इकाई ने चेतावनी दी है कि अगर किसी छात्र को फोन कॉल, ई-मेल, व्हाट्सएप मैसेज या सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, तो उसे तुरंत संदेह की नजर से देखा जाए। अधिकारी बताते हैं कि साइबर अपराधी परीक्षा के दबाव का फायदा उठाकर छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
अगर किसी अभ्यर्थी को इस तरह की कोई संदिग्ध सूचना मिलती है तो उसे तुरंत नजदीकी थाना या साइबर थाना को सूचित करना चाहिए।
EOU ने छात्रों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी अपुष्ट संदेश को आगे साझा न करें। अक्सर पेपर लीक या प्रश्नपत्र वायरल होने जैसी अफवाहें तेजी से फैल जाती हैं, जिससे छात्रों के बीच भ्रम और तनाव पैदा होता है। इससे परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है। अगर किसी को सोशल मीडिया पर पेपर लीक से जुड़ी कोई पोस्ट दिखाई देती है, तो उसका URL सुरक्षित रखें और संबंधित एजेंसी को इसकी जानकारी दें।
आर्थिक अपराध इकाई ने बताया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, साइबर ठगी या पेपर लीक से जुड़ी सूचना सीधे EOU बिहार को दी जा सकती है। इसके अलावा साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर सूचना मिलने से ऐसे नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।
EOU ने चेतावनी दी है कि परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग, पेपर लीक या किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को गंभीर अपराध माना जाएगा। पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती अफवाहों और साइबर ठगी से बचना है। EOU की यह एडवाइजरी छात्रों को जागरूक करने और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपनी तैयारी पर ध्यान दें, किसी भी शॉर्टकट के लालच में न आएं और केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें।
Location : Patna
Published : 9 June 2026, 2:02 PM IST