US Army Recruitment: क्या भारत से सीधे अमेरिकी कमांडो बनना मुमकिन है? जानें पेंटागन का वो सीक्रेट नियम जो कोई नहीं बताता

क्या कोई भारतीय सीधे अमेरिकी स्पेशल फोर्स में भर्ती हो सकता है? जानिए अमेरिकी सेना के कड़े इमीग्रेशन नियम, 'MAVNI' प्रोग्राम के बंद होने का सच और मिलिट्री सर्विस के जरिए सुपर-फास्ट ग्रीन कार्ड व नागरिकता पाने का पूरा गणित।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 16 July 2026, 1:47 PM IST
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New Delhi: अमेरिकी सेना और उसकी दुनिया की सबसे घातक 'स्पेशल फोर्सेज' का हिस्सा बनने का रोमांच हर युवा के सिर चढ़कर बोलता है। सोशल मीडिया के इस दौर में अक्सर यह सवाल तैरता रहता है कि क्या एक भारतीय नागरिक सीधे अमेरिकी सेना में भर्ती होकर वहां की नागरिकता हासिल कर सकता है?

पहली नजर में यह सपना जितना लुभावना लगता है, पेंटागन के कानूनी गलियारों में इसके नियम उतने ही कड़े और स्पष्ट हैं। भारत से सीधे अमेरिकी सेना या स्पेशल फोर्स में जाने का कोई शॉर्टकट नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिकी इमीग्रेशन और मिलिट्री लॉ का एक बड़ा चक्रव्यूह है।

वीजा धारक नहीं, सिर्फ ग्रीन कार्ड वालों को ही मिलेगा हथियार उठाने का हक

अगर आप सोचते हैं कि स्टूडेंट वीजा, टूरिस्ट वीजा या एच-1बी (H-1B) वर्क वीजा पर अमेरिका जाकर आप सेना में भर्ती हो सकते हैं, तो आप गलत हैं। अमेरिकी सेना के नियमों के मुताबिक, किसी भी गैर-अमेरिकी नागरिक को सेना में शामिल होने के लिए सबसे पहले अमेरिका का वैध स्थायी निवासी यानी 'ग्रीन कार्ड' होल्डर होना अनिवार्य है।

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इसके बिना आपकी आवेदन फाइल को हाथ भी नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा, स्पेशल फोर्स (जैसे नेवी सील्स या ग्रीन बेरेट्स) का हिस्सा बनने की प्रक्रिया और भी जटिल है, जो सामान्य सेना में भर्ती होने और वहां बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद ही शुरू होती है।

MAVNI का बंद होना: उन खास कौशलों का रास्ता हुआ ब्लॉक

एक समय था जब अमेरिका में 'मिलिट्री एक्सेसन्स वाइटल टू द नेशन इंटरेस्ट' (MAVNI) नाम का एक विशेष कार्यक्रम चलता था। इसके तहत चिकित्सा, तकनीक या विशिष्ट विदेशी भाषाओं (जैसे हिंदी या पंजाबी) के जानकारों को बिना ग्रीन कार्ड के भी सीधे अमेरिकी सेना में भर्ती होने का मौका मिलता था।

लेकिन सुरक्षा कारणों और नीतियों में बदलाव के चलते फिलहाल यह कार्यक्रम पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। यानी, अब सीधे कौशल के दम पर सीधे सेना में घुसने का रास्ता बंद हो चुका है।

सैन्य सेवा से 'फास्ट ट्रैक' नागरिकता: क्या है इस नियम का सच?

पेंटागन में सेवा देने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह अमेरिकी नागरिकता का रास्ता बेहद आसान और तेज कर देता है। अमेरिकी इमीग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट (INA) की धारा 328 और 329 के तहत, यदि कोई ग्रीन कार्ड धारक शांति काल में कम से कम एक वर्ष की सम्मानजनक सैन्य सेवा पूरी कर लेता है, तो उसे नागरिकता के लिए जरूरी सामान्य निवास अवधि (आमतौर पर 5 वर्ष) में बड़ी छूट मिल जाती है।

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हालांकि, केवल भर्ती होना ही नागरिकता की गारंटी नहीं है; इसके लिए सैनिक का अच्छा आचरण, अंग्रेजी भाषा पर पकड़ और नागरिक शास्त्र के टेस्ट को पास करना अनिवार्य होता है।

क्या भारत में बैठकर किया जा सकता है आवेदन?

इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है'बिलकुल नहीं'। अमेरिकी सेना के नियमों के अनुसार, कोई भी विदेशी नागरिक अपने मूल देश में रहते हुए सेना की भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकता। आवेदन करने के समय उम्मीदवार का भौतिक रूप से अमेरिका में मौजूद होना और उसके पास वैध ग्रीन कार्ड का होना अनिवार्य शर्त है।

Location :  New Delhi

Published :  16 July 2026, 1:47 PM IST

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