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मिडिर ईस्ट में तनाव और ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद प्रदर्शन की आग अन्य देशों में भी पहुंच गई है। इस हमले पर कई भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।
मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया आयी सामने
New Delhi: ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव के हालत पैदा हो गए हैं। प्रदर्शन की आग पाकिस्तान समेत कई देशों तक पहुंच चुकी है। पाकिस्तान समेत कई देश अमेरिका और इजराइल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस हमले पर कई भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।
ईरान-इजराइल विवाद पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री का एयरक्राफ्ट हवा में होता और ऐसा हमला होता, तो कौन जिम्मेदार होता? प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि क्या नेतन्याहू ने उन्हें बताया था कि इजराइल ईरान पर हमला करने वाला है। अगर बताया था, तो प्रधानमंत्री को तुरंत अपना दौरा खत्म करके देश लौट जाना चाहिए था।
अगर इज़राइल ने हमें नहीं बताया कि वह US के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर रहा है, तो इजराइल ने हमें धोखा दिया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के दौरे का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने और गाजा में फिलिस्तीनियों के नरसंहार को छिपाने के लिए किया है। इससे यह मैसेज जाएगा कि भारत इजराइल के साथ है, ईरान के साथ नहीं। इस हमले से भारत को क्या मिल रहा है?
इजरायल-ईरान युद्ध और खाड़ी देशों में तनाव के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जंग के इन हालातों में हमारे देश की सरकार को इस अंतरराष्ट्रीय विषय पर अपना रुख़ साफ़ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि अमन और युद्ध को रोकने व शांति की बहाली के लिए एक तटस्थ देश होने के नाते भारत क्या कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
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हमारे देश की सरकार, हर संभव स्तर पर, युद्ध में मारे जानेवालों से जुड़ी ख़बरों की पुष्टि करे और सच क्या है ये जनता के सामने रखे। युद्धकालीन समाचार अक्सर रणनीति का हिस्सा होते हैं, इसीलिए उनकी पुष्टि की ज़रूरत होती है। इंसान के साथ इंसानियत का मारा जाना बेहद अफ़सोसजनक है। हर देश को ज़िम्मेदाराना व्यवहार करना चाहिए।"
ईरान-इजराइल झगड़े पर, पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि हमारी पार्टी ने साफ-साफ कहा है कि यह बहुत मुश्किल समय है। दुनिया भर में हमारे दोस्त हैं। लेकिन बदकिस्मती से, हम अपने दोस्तों से, चाहे वे कोई भी हों, बात करने की हिम्मत नहीं दिखा रहे हैं कि कुछ बहुत गलत हो रहा है।
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हम यूरोप में रूस और यूक्रेन के बीच ऐसा नहीं कर सके। ऐसा ही कुछ वेस्ट एशिया में भी हुआ लगता है। हमारे प्राइम मिनिस्टर इजराइल गए थे। ईरान के साथ भी हमारे रिश्ते हैं। चाहे जो भी हो रहा है, उसमें हम शामिल हों, यह हमारे लिए बुरी बात है। दुनिया के लिए।