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ईरान ने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट गिराने का दावा किया है, लेकिन अमेरिका ने इसे झूठ बताया है। तस्वीरों और दावों पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे यह मामला अब सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि सूचना युद्ध का हिस्सा बन गया है।
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New Delhi: मिडिल ईस्ट के आसमान में एक बार फिर हलचल मच गई है। दावों और जवाबी दावों के बीच ऐसा माहौल बन गया है, मानो हर पल कोई बड़ा सैन्य टकराव होने वाला हो। इसी तनाव के बीच एक नया दावा सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है और सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान का बड़ा दावा
ईरान और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक और बड़ा दावा किया है। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, उसकी सेना ने एक अमेरिकी F-35 Lightning II स्टील्थ फाइटर जेट को मार गिराया है। Islamic Revolutionary Guard Corps यानी आईआरजीसी के हवाले से बताया गया कि यह कार्रवाई मध्य ईरान के आसमान में की गई। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने इस घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें कथित तौर पर मलबा दिखाया गया है।
क्या सच में गिराया गया दूसरा F-35?
ईरान का दावा है कि उसने पिछले 24 घंटों में यह दूसरा F-35 विमान गिराया है। इससे पहले भी 2 अप्रैल और 23 मार्च को इसी तरह के दावे किए जा चुके हैं। ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिकी अत्याधुनिक सैन्य तकनीक को भी चुनौती देने की क्षमता रखता है। हालांकि इन दावों की पुष्टि अब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी ने नहीं की है, जिससे पूरे मामले पर संदेह बना हुआ है।
अमेरिका ने दावों को बताया झूठ
वहीं दूसरी तरफ United States Central Command यानी सेंटकॉम ने ईरान के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि उसके सभी लड़ाकू विमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और ईरान पहले भी कई बार इस तरह के झूठे दावे करता रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म पर जो तस्वीरें और वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, वे भ्रामक हैं और असली घटना से उनका कोई संबंध नहीं है।
तस्वीरों पर उठे सवाल
ईरान द्वारा जारी तस्वीरों पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों और एआई विश्लेषण के मुताबिक, इन तस्वीरों में F-35 की पहचान से जुड़े जरूरी फीचर्स नजर नहीं आ रहे हैं। मलबे पर अमेरिकी एयरफोर्स के सामान्य निशान जैसे USAF स्टार या टेल कोड दिखाई नहीं देते। इतना ही नहीं, तस्वीरों में जो डिजाइन दिख रहा है, वह F-35 के स्टील्थ स्ट्रक्चर से मेल भी नहीं खाता। कुछ हिस्सों पर “EUROPE” लिखा होना भी संदेह को और बढ़ाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मलबा किसी पुराने विमान का भी हो सकता है। अब तक किसी भी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोत ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे दावे
यह पहला मौका नहीं है जब ईरान ने इस तरह का दावा किया हो। 23 मार्च को किए गए दावे पर अमेरिका ने कहा था कि उसका विमान मिशन के बाद सुरक्षित लैंड कर चुका था। वहीं 2 अप्रैल को किए गए दावे को भी अमेरिका ने खारिज कर दिया था। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच सिर्फ सैन्य तनाव ही नहीं, बल्कि सूचना युद्ध भी चल रहा है, जिसमें दावों और प्रचार का खेल जारी है।