US Visa Fees Hike:अमेरिकी नागरिकता पाना होगा 80% तक महंगा, जानें इससे भारतीयों को क्या होगा नफा-नुकसान

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने नागरिकता और ग्रीन कार्ड आवेदन फीस में 80% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। इस फैसले से अमेरिका में रह रहे 67 लाख भारतीयों के साथ-साथ आईटी सेक्टर और छात्रों पर बड़ा असर पड़ेगा। पूरी रिपोर्ट में समझें इसके नफा-नुकसान।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 28 June 2026, 9:23 AM IST
google-preferred

New Delhi: अमेरिका में बसने और वहां की नागरिकता (Citizenship) पाने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ी खबर है। ट्रंप प्रशासन ने एक नया नियम प्रस्तावित किया है, जिसके तहत नागरिकता आवेदन फॉर्म की फीस में भारी बढ़ोतरी की जा सकती है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, नागरिकता के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म एन-400 (N-400) की ऑफलाइन फीस 760 डॉलर से बढ़ाकर 1,330 डॉलर (करीब 75% वृद्धि) और ऑनलाइन आवेदन फीस 710 डॉलर से बढ़ाकर 1,280 डॉलर (करीब 80% वृद्धि) करने की तैयारी है।

वर्तमान में यह नियम 60 दिनों के लिए सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रक्रिया के तहत है, जिसके बाद इसे लागू किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक अमेरिका में लगभग 67 लाख भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं, जिन पर इसका सीधा असर होना तय है।

भारतीयों को क्या फायदा होगा?

इस फीस बढ़ोतरी और कड़े नियमों का एक सकारात्मक पहलू भी हो सकता है। फीस बढ़ने से केवल गंभीर और आर्थिक रूप से सक्षम आवेदक ही आगे आएंगे, जिससे अनावश्यक आवेदनों की संख्या में कमी आएगी। इसके परिणामस्वरूप, अमेरिकी आव्रजन विभाग (USCIS) में लंबित पड़े (Backlog) आवेदनों की फाइलें तेजी से क्लियर हो सकती हैं।

मिडिल ईस्ट में सीजफायर तार-तार: ईरान के मिसाइल ठिकानों पर भीषण हमला, जानें अमेरिका ने क्यों लिया बड़ा सैन्य एक्शन

दूसरा बड़ा फायदा यह होगा कि जो भारतीय पहले से वहां अच्छी आय पर काम कर रहे हैं, उनके लिए प्रोसेसिंग समय कम हो सकता है। इसके अलावा, कम आय वाले परिवारों (संघीय गरीबी मानक के 400% से कम) के लिए 380 डॉलर की रियायती फीस को यथावत रखा गया है, जिससे कमजोर आर्थिक वर्ग के भारतीयों का संरक्षण होगा।

भारतीयों को क्या होगा नुकसान?

नुकसान की बात करें तो मध्यमवर्गीय भारतीयों के लिए अब अमेरिकी नागरिकता पाना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन जाएगा। प्रस्ताव में रियायती शुल्क और शुल्क माफी (Fee Waiver) की व्यवस्था को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है, जो कई लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में वैसे ही भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने की संख्या में 50% की भारी गिरावट आई है (वर्ष 2022 में 1,27,010 से घटकर वर्ष 2024 में यह केवल 66,800 रह गई है)। ऐसे में फीस बढ़ने से स्थायी रूप से बसने की प्रक्रिया और ज्यादा कड़वी और महंगी हो जाएगी।

आईटी सेक्टर (IT Sector) पर क्या पड़ेगा असर?

अमेरिकी नागरिकता और वीजा प्रक्रियाओं के महंगे होने का सबसे सीधा और बड़ा असर भारतीय आईटी सेक्टर (IT Sector) पर दिखाई देगा। भारतीय आईटी कंपनियां (जैसे TCS, Infosys, Wipro) हर साल बड़ी संख्या में अपने इंजीनियर्स और प्रोफेशनल्स को शॉर्ट टर्म प्रोजेक्ट्स और ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजती हैं। आवेदन और प्रशासनिक फीस में बढ़ोतरी से इन कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ेगा।

खर्च बढ़ने के कारण कंपनियां अब भारतीय कर्मचारियों को ऑन-साइट भेजने से परहेज करेंगी या शॉर्ट-टर्म कोर्सेज को सपोर्ट करना बंद कर देंगी। इसका असर आईटी सेक्टर के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा और कंपनियां अब अमेरिका के बजाय वर्क-फ्रॉम-होम या रिमोट वर्किंग मॉडल को अधिक बढ़ावा देंगी।

‘मिर्जापुर: द मूवी’ से पहले मेकर्स का सरप्राइज वीडियो, क्या अमेरिका तक पहुंचेगा गुड्डू भैया का भौकाल?

छात्रों के भविष्य और करियर प्लानिंग पर गहरा प्रभाव

इस नीति का एक और गंभीर प्रभाव अमेरिका में पढ़ाई करने वाले या वहां जाने की चाह रखने वाले भारतीय छात्रों पर पड़ेगा। अब तक कई मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप के सहारे अमेरिका में उच्च शिक्षा और फिर वहीं सेटल होने का मौका मिलता था। लेकिन नागरिकता और कानूनी प्रक्रियाओं के महंगे होने से छात्रों का भविष्य अनिश्चित हो जाएगा।

कंपनियां अब विदेशी छात्रों को स्पॉन्सर करने में कतराएंगी, जिससे पढ़ाई के बाद मिलने वाली नौकरियों के अवसर कम हो जाएंगे। भारतीय छात्र अब अमेरिका के बजाय कनाडा, जर्मनी या यूके जैसे देशों का रुख कर सकते हैं, जहाँ नागरिकता के नियम अपेक्षाकृत आसान और कम खर्चीले हैं।

Location :  New Delhi

Published :  28 June 2026, 9:23 AM IST

Related News

No related posts found.

Advertisement