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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले कर सकता है। इस बीच अमेरिकी सेना ने ईरान में घायल एफ-15 पायलट को बहादुरी से बचाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Image Source: Google )
Washington: रविवार की शाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कड़ा संदेश भेजा, जिसे देखकर दुनिया भर के राजनैतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। ट्रंप ने साफ कर दिया कि अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों और महत्वपूर्ण पुलों पर हमले करने से नहीं हिचकिचाएगा। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तूफान मचा दिया और मध्यपूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया।
राष्ट्रपति ने अपने प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मंगलवार को ईरान में एक ही दिन में ऊर्जा संयंत्र दिवस और पुल दिवस मनाया जाएगा। ट्रंप ने अपने संदेश में सीधे शब्दों में चेताया, “जलडमरूमध्य खोल दें, पागलों, वरना नरक में जाओगे। अल्लाह से प्रार्थना करिए।”
इससे पहले ट्रंप ने एक और पोस्ट में अमेरिकी सेना की बहादुरी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ईरान की पहाड़ियों में गंभीर रूप से घायल एफ-15 क्रू मेंबर/अफसर को बचाया गया। राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरानी सेना उन्हें खोज रही थी और करीब आ रही थी, लेकिन अमेरिकी टीम ने उच्चतम स्तर की सावधानी और कौशल के साथ इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
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विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का बयान सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सैन्य चेतावनी भी है। यदि ईरान ने जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो अमेरिका के पास उसके ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले के लिए रणनीति तैयार है। यह जलडमरूमध्य विश्व व्यापार और तेल परिवहन का एक अहम मार्ग है। इसके बंद होने का मतलब न केवल वैश्विक तेल बाजार में हलचल, बल्कि मध्यपूर्व और अमेरिका के बीच गंभीर तनाव भी होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की इस चेतावनी ने ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह चेतावनी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कदम उठाए जा सकते हैं।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भगवान हमारे महान सैनिकों को आशीर्वाद दें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की प्राथमिकता अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा है। ट्रंप के इस बयान ने अमेरिकी जनता में देशभक्ति और सैनिकों के प्रति गर्व की भावना भी जगा दी है।