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डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। कभी जंग की बात तो कभी शांति का संकेत, इस बदलते रुख ने वैश्विक राजनीति और बाजारों में हलचल मचा दी है। आखिर ट्रंप की असली रणनीति क्या है और क्यों उनके बयान बार-बार बदल रहे हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Img: Google)
Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अकसर अपने बदलते बयानों को लेकर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। हाल के महीनों में खासकर ईरान को लेकर उनके लगातार बदलते रुख ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों को चौंकाया है, बल्कि दुनिया भर के देशों को भी हैरत में डाल दिया है।
कभी युद्ध को "जरूरी" बताना और कुछ ही समय बाद उसे खत्म करने की बात करना, ट्रंप की इस रणनीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को लेकर ट्रंप के बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। उन्होंने एक ओर इस ऑपरेशन को लोकतंत्र की जीत बताया, तो दूसरी ओर इसे व्यक्तिगत सुरक्षा से जोड़ दिया।
28 फरवरी 2026 को उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत को खत्म करने की बात कही, लेकिन थोड़ी ही देर बाद ईरान की जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील कर दी।
1 मार्च को उन्होंने दावा किया कि ईरान के सुप्रीम लीडर उन्हें निशाना बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने पहले कार्रवाई की। इससे यह सवाल उठा कि युद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा था या व्यक्तिगत खतरे का।
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ट्रंप ने 2 मार्च को कहा कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन उसी दिन बाद में उन्होंने कहा कि अमेरिका अनिश्चित काल तक लड़ने के लिए तैयार है।
3 मार्च को उन्होंने इसे “लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष” बताया। इस तरह के बयानों ने न केवल अमेरिकी नीति को अस्पष्ट किया, बल्कि सहयोगी देशों को भी असहज कर दिया।
ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री Marco Rubio के उस संकेत को भी खारिज कर दिया, जिसमें इजरायल की भूमिका की बात कही गई थी। ट्रंप ने साफ कहा कि यह निर्णय पूरी तरह उनका था। इससे यह संकेत मिला कि प्रशासन के भीतर भी एकरूपता की कमी है।
एक ओर ट्रंप ने “मिशन कंप्लीट” का दावा किया, वहीं रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा कि युद्ध और तेज हो रहा है। इस विरोधाभास ने दुनिया भर के विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अमेरिका की असली रणनीति क्या है।
Strait of Hormuz को लेकर ट्रंप का रुख भी तेजी से बदला। पहले उन्होंने कहा कि इसकी सुरक्षा अब दूसरे देशों को खुद करनी चाहिए, लेकिन दो दिन बाद ही उन्होंने इसे खोलने और नियंत्रण लेने की बात कही। इस बदलाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा, जहां कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया।
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ट्रंप के बदलते रुख ने अमेरिका के सहयोगी देशों को भी असमंजस में डाल दिया है। यूरोप और एशिया के कई देशों ने अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। NATO जैसे संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।