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इजरायली विमानों को निशाना बनाने की खतरनाक योजना (Img: X)
New Delhi: तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को हुई घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, को-पायलट हमाम अल-हमामी की पिछली गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। ओमान के 29 वर्षीय नागरिक पर कॉकपिट के अंदर फ्लाइट के भारतीय कैप्टन, स्मित मच्छार के साथ मारपीट करने और विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश करने का आरोप है। यात्रियों और क्रू ने उसे काबू में किया जिसके कारण सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। UAE ने इस घटना को संभावित आतंकवादी कार्रवाई बताया है।
जांच के दौरान सामने आई जानकारी से पता चलता है कि अल-हमामी पहले ओमान एयर में पायलट ट्रेनिंग से जुड़े थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में उनके पास चरमपंथी सामग्री मिलने के बाद उन्हें फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया गया था। इसके बाद, उन्हें एयरलाइन में प्रशासनिक काम सौंपे गए थे। अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि उनके कथित कट्टरपंथी विचारों और ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर पहले भी चिंताएं जताई गई थीं।
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इससे एक अहम सवाल उठता है: फ्लाइट ट्रेनिंग से हटाए गए व्यक्ति को एक अंतरराष्ट्रीय यात्री एयरलाइन के लिए को-पायलट के तौर पर कैसे नियुक्त किया गया? जांच एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि अलग-अलग देशों और एयरलाइनों के बीच सुरक्षा से जुड़ी जानकारी किस हद तक साझा की गई थी।
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के बाद उनसे जुड़ी एक लिंक्डइन प्रोफाइल पर दो पोस्ट दिखाई दिए। बताया जाता है कि इनमें बोइंग 737 मैक्स कॉकपिट के वीडियो और इजराइली एयरलाइनों के विमानों के फुटेज शामिल थे। एक क्लिप में 'एल अल' (El Al) विमान दिखाया गया था, जबकि दूसरे में इजराइली एयरलाइन 'आर्किया' (Arkia) का विमान था। हालांकि, रिपोर्ट्स में इस प्रोफाइल और उससे जुड़े पोस्ट की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर सावधानी बरती गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पोस्ट में आतंकवाद से जुड़े लोगों की तस्वीरें शामिल थीं, जिनमें अल-कायदा के पूर्व नेता अयमान अल-जवाहिरी भी शामिल थे। इस बीच अल-कायदा की यमन स्थित शाखा, AQAP ने बाद में फ्लाईदुबई की घटना की तारीफ की और अमेरिका और इजराइल से जुड़ी एयरलाइनों के खिलाफ इसी तरह के हमलों का आह्वान किया। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है कि अल-हमामी सीधे तौर पर अल-कायदा के किसी ऑपरेशनल नेटवर्क का हिस्सा था या नहीं।
इस मामले ने न केवल अल-हमामी की भूमिका पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक क्षेत्रीय राजनयिक के अनुसार, फ्लाईदुबई में नियुक्ति से पहले उसकी सामान्य सुरक्षा जांच हुई थी; हालांकि, अब यह जांच का विषय है कि क्या कट्टरपंथ के संकेतों के लिए पर्याप्त जांच की गई थी। एपी (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसने अकेले काम किया या किसी चरमपंथी संगठन से उसके संबंध थे।
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रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि इजरायली अधिकारियों के पास पहले से ही उड़ान दल (फ्लाइट क्रू) की सूची थी, फिर भी अल-हमामी के संबंध में कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। इस खुलासे के बाद विदेशी एयरलाइनों के पायलटों की जांच-पड़ताल (वेटिंग) प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
अल-हमामी ने यूके में बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से एविएशन मैनेजमेंट में डिस्टेंस-लर्निंग कोर्स पूरा किया था। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि उसने वहां पायलट प्रशिक्षण नहीं लिया था। उसके शैक्षणिक और पेशेवर रिकॉर्ड, साथ ही ऑस्ट्रेलिया में बिताया गया समय और उसकी कथित चरमपंथी गतिविधियों की फिलहाल जांच की जा रही है। जांच के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है: यदि उसके संबंध में सुरक्षा चिंताएं वर्षों पहले सामने आ गई थीं, तो वह जानकारी बाद की एयरलाइन नियोक्ताओं या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सुरक्षा जांच प्रक्रियाओं तक क्यों नहीं पहुंची? इस सवाल का जवाब यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि क्या 30 सितंबर की घटना किसी एक व्यक्ति का कृत्य थी या इसमें सुरक्षा प्रणाली में कोई बड़ी चूक शामिल थी।
Location : New Delhi
Published : 5 October 2026, 2:44 PM IST