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नाना पाटेकर के 10 आइकॉनिक डायलॉग (Img- Dynamite News)
Mumbai: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Nana Patekar का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, गोवा स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टर सफल नहीं हो सके।
नाना पाटेकर अपने अभिनय के साथ-साथ अपनी खास संवाद अदायगी के लिए भी पहचाने जाते थे। उनके बोले संवाद केवल फिल्म का हिस्सा नहीं रहे, बल्कि दर्शकों के बीच उनकी अलग पहचान बन गए।
साल 1994 में रिलीज हुई फिल्म क्रांतिवीर नाना पाटेकर के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उनके संवादों और अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने’ आज भी नाना पाटेकर के सबसे चर्चित संवादों में गिना जाता है। इसी फिल्म का ‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून’ वाला संवाद भी बेहद चर्चित हुआ था।
फिल्म यशवंत में नाना पाटेकर ने पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था। इस फिल्म के कई संवाद लोकप्रिय हुए। ‘एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है’ और ‘सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान’ जैसे संवाद उनके आक्रामक और बेबाक अंदाज की मिसाल बने।
नाना पाटेकर की फिल्मों की सूची में तिरंगा और परिंदा भी खास स्थान रखते हैं। तिरंगा में उनका ‘मराठा मरता है या मारता है’ वाला संवाद खूब लोकप्रिय हुआ। वहीं परिंदा में उनका संवाद ‘धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं’ उनके किरदार की सख्ती और दुनिया को देखने के नजरिए को सामने रखता है।
अब तक छप्पन में नाना पाटेकर ने पुलिस अधिकारी साधु आगाशे का किरदार निभाया। फिल्म के संवादों में उनका सधा हुआ और बेबाक अंदाज देखने को मिला। ‘हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है’ जैसे संवाद खूब चर्चा में रहे।
फिल्म प्रहार में नाना पाटेकर ने सैनिक के किरदार के जरिए अलग प्रभाव छोड़ा। ‘एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है’ जैसा संवाद उनके किरदार की सोच को दर्शाता है।
इसके उलट वेलकम में उदय शेट्टी के रूप में उन्होंने कॉमेडी का ऐसा अंदाज दिखाया, जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं। ‘साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे’ फिल्म के सबसे लोकप्रिय संवादों में शामिल रहा।
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नाना पाटेकर की खासियत सिर्फ उनके संवाद नहीं, बल्कि उन्हें बोलने का तरीका था। उनकी डायलॉग डिलीवरी बनावटी अभिनय से अलग लगती थी। वह संवादों को इस तरह पेश करते थे, जैसे सामने बैठे व्यक्ति से वास्तविक बातचीत कर रहे हों।
इसी सहजता, तीखे तेवर और आवाज के उतार-चढ़ाव ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे अलग अभिनेताओं में जगह दिलाई। दशकों के करियर में उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी तक अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की। उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
Location : Mumbai
Published : 8 October 2026, 10:57 AM IST