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विजय वर्मा और फातिमा सना शेख की फिल्म ‘गुस्ताख़ इश्क़’ ने पहले दिन सिर्फ़ ₹50 लाख का कलेक्शन किया। धनुष–कृति की ‘तेरे इश्क़ में’ की 16.50 करोड़ की ओपनिंग ने इसे कड़ी टक्कर दी। जानें फिल्म की ऑक्यूपेंसी, कास्ट और पूरी कहानी।
गुस्ताख इश्क (Img Source: Google)
Mumbai: विजय वर्मा और फातिमा सना शेख़ स्टारर रोमांटिक ड्रामा ‘गुस्ताख़ इश्क़’ 28 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। विभु पुरी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1990 के दशक पर आधारित है, जिसमें पुरानी दिल्ली का माहौल, क्लासिक रोमांस और कविता की सुगंध दर्शकों को एक अलग यात्रा पर ले जाने की कोशिश करती है। लेकिन रिलीज़ के साथ ही इसे धनुष और कृति सेनन की बिग-टिकट फिल्म ‘तेरे इश्क़ में’ से कड़ी टक्कर मिली, जिसका असर इसके ओपनिंग कलेक्शन पर साफ दिखा।
‘गुस्ताख़ इश्क़’ ने पहले दिन कितना कलेक्शन किया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर बेहद निराशाजनक शुरुआत की है।
Day 1 Collection: ₹50 लाख
सैकनिल्क की अर्ली ट्रेड रिपोर्ट्स बताती हैं कि ‘गुस्ताख़ इश्क़’ ने पहले दिन सिर्फ़ 50 लाख रुपये कमाए। यह आंकड़ा उम्मीदों से बेहद कम है और फिल्म के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह शुरुआती आंकड़े हैं, ऑफिशियल नंबर आने के बाद मामूली बदलाव संभव है।
कमजोर ओपनिंग की मुख्य वजह
फिल्म की हिंदी ऑक्यूपेंसी पहले दिन सिर्फ़ 8.61% रही। वहीं दूसरी तरफ, आनंद एल राय की ‘तेरे इश्क़ में’ ने उसी दिन ₹16.50 करोड़ की धमाकेदार ओपनिंग की। क्लैश का सीधा असर ‘गुस्ताख़ इश्क़’ पर पड़ा और यह लाखों में सिमटकर फीकी शुरुआत करने पर मजबूर हुई। अब फिल्म की उम्मीदें पूरी तरह वीकेंड के कलेक्शन और वर्ड ऑफ माउथ पर टिकी होंगी। सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर इसकी कमाई में बढ़ोतरी संभव है।
फिल्म में बेहतरीन एक्टर्स की टुकड़ी शामिल है:
इन कलाकारों के अभिनय की काफी चर्चा हो रही है, लेकिन बड़ी फिल्म के साथ रिलीज़ होने का नुकसान कलेक्शन में साफ दिख रहा है।
फिल्म की कहानी नवाबुद्दीन सैफुद्दीन रहमान (विजय वर्मा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पुरानी दिल्ली में अपने पिता के संघर्षरत प्रिंटिंग प्रेस को बचाने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान उसकी मुलाकात एक रिटायर्ड कवि अजीज (नसीरुद्दीन शाह) से होती है, जिसका वह शिष्य बन जाता है।
अजीज की बेटी मिन्नी (फातिमा सना शेख), जो एक शिक्षिका है, धीरे-धीरे नवाबुद्दीन की ज़िंदगी में प्यार की नई रोशनी भरने लगती है। फिल्म कविता, पुराने ज़माने के इश्क़ और रिश्तों की जटिलता को खूबसूरती से पेश करने की कोशिश करती है।
फिल्म की ओपनिंग बेहद कमजोर रही है, लेकिन कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों का भविष्य वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करता है। अगर दर्शकों को कहानी और अभिनय पसंद आता है, तो वीकेंड पर कलेक्शन में उछाल देखने को मिल सकता है।
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