छह गोलियों की गूंज ने तोड़ा रिश्तों का आखिरी धागा, बहन की हत्या करने वाले निक्कू को फांसी; जानें संपत्ति विवाद की खौफनाक कहानी

आगरा की एक पुरानी रंजिश ने ऐसा मोड़ लिया कि भाई-बहन का रिश्ता खून से रंग गया। संपत्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार अदालत तक पहुंचा और साढ़े तीन साल बाद न्याय का फैसला सामने आया। आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ था कि एक भाई अपनी ही बहन का दुश्मन बन बैठा?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 17 June 2026, 2:26 PM IST

Agra: आगरा के शाहगंज इलाके में रहने वाले लोगों को शायद ही अंदाजा रहा होगा कि एक पारिवारिक विवाद एक दिन इतना भयावह रूप ले लेगा कि एक बहन की जिंदगी छीन ली जाएगी और उसका भाई फांसी के फंदे तक पहुंच जाएगा। यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि उस लालच की है जिसने खून के रिश्तों को भी बेमानी बना दिया।

मंगलवार को अदालत ने बहन पूनम चौधरी की हत्या के मामले में उसके भाई ललित चौधरी उर्फ निक्कू को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने इसे 'विरलतम अपराध' की श्रेणी में माना और कहा कि दोषी ने निर्ममता की सारी सीमाएं पार कर दी थीं।

जिस ताले ने छीन ली एक बहन की जिंदगी

26 नवंबर 2022 की सुबह शाहगंज के जोगीपाड़ा इलाके में सामान्य दिनों की तरह शुरू हुई थी। घर के बाहर बनी दुकानों पर ताला लगाया जा रहा था। पूनम चौधरी और उनकी भाभी नीलू चौधरी संपत्ति में अपने हिस्से की मांग को लेकर दुकान बंद कर रही थीं। इसी दौरान वहां ललित चौधरी उर्फ निक्कू पहुंच गया। दुकान पर ताला लगाने को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हुई। बात बढ़ती गई और गुस्सा इतना बढ़ा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि अगले कुछ सेकंड में क्या होने वाला है।

मेरा बेटा तो चला गया, रिश्तेदारों को क्यों सजा दे रहे हैं? अंतिम संस्कार के बीच पिता अपील से पसीजा सबका दिल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान निक्कू ने हथियार निकाला और अपनी बहन पूनम पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। छह गोलियां पूनम के शरीर में लगीं। वहीं एक गोली नीलू चौधरी के हाथ में लगी। पूनम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि आरोपी वहां से फरार हो गया।

दो दिन बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी

घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास और आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। जांच शुरू हुई और दो दिन बाद 28 नवंबर 2022 को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद निक्कू को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 30 एमएम की पिस्टल भी बरामद हुई। गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया गया, जहां से वह लगातार न्यायिक हिरासत में रहा।

अदालत में चली लंबी कानूनी लड़ाई

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस गवाह पेश किए। इनमें प्रत्यक्षदर्शी, चिकित्सक और जांच अधिकारी शामिल थे। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने यह दावा किया कि घटना के समय निक्कू वहां मौजूद नहीं था और दो अज्ञात युवक हथियार लेकर भागते हुए दिखाई दिए थे। हालांकि अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और गवाहों को विश्वसनीय माना। कोर्ट ने पाया कि हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध और बेहद क्रूर तरीके से की गई थी।

जब वह मेरी नहीं हो सकती, तो… प्रेमिका से दूरी बर्दाश्त नहीं कर सका युवक, गुस्से में ले ली दादा-दादी और बुआ की जान

जब कोर्ट में सुनाई गई फांसी की सजा

फैसले के दिन निक्कू को फिरोजाबाद जेल से पुलिस सुरक्षा में अदालत लाया गया। सुबह करीब साढ़े नौ बजे अदालत ने अपना फैसला सुनाया। जैसे ही फांसी की सजा का ऐलान हुआ, कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया। बताया जाता है कि निक्कू कुछ देर तक गुमसुम खड़ा रहा। कभी वह छत की तरफ देखता तो कभी जमीन की ओर। उसकी आंखों से आंसू भी निकल आए। बाद में उसने उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही।

अपराध की दुनिया से भी जुड़ा रहा परिवार

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, निक्कू का परिवार पहले भी अपराध जगत में चर्चित रहा है। वह शाहगंज क्षेत्र के कुख्यात सुपारी किलर ओपी और लाला का भतीजा है। दोनों का नाम कई चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आ चुका था।

Location :  Agra

Published :  17 June 2026, 2:26 PM IST