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मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि के बाद शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद केस ने नया मोड़ ले लिया है। पीड़ित बटुकों के आरोप, कोर्ट के आदेश पर दर्ज केस और बढ़ते दबाव के बीच अब गिरफ्तारी की आशंका तेज हो गई है।
स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद
New Delhi: अंधेरे में दबे सच अब सामने आने लगे हैं। धर्म और आस्था की आड़ में चल रहे एक कथित खौफनाक खेल ने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। यौन शोषण के आरोपों में घिरे शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं और अब उनकी गिरफ्तारी की तलवार लटकती दिख रही है। पीड़ित बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट ने मामले को और भी संगीन बना दिया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को अपराध की भयावह तस्वीर में बदल दिया है।
मेडिकल रिपोर्ट से हुआ सनसनीखेज खुलासा
पीड़ित बटुकों की कराई गई मेडिकल जांच में जो सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। रिपोर्ट में साफ तौर पर यौन शोषण और उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ितों के साथ जबरन यौन कृत्य किए गए, उनके साथ शारीरिक जोर-जबरदस्ती हुई और उन्हें मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया। यह खुलासा सामने आने के बाद पूरे मामले ने गंभीर कानूनी रूप ले लिया है और जांच एजेंसियों की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है।
पीड़ित बटुकों के आरोप
पीड़ित बटुकों ने आरोप लगाया है कि गुरु दीक्षा के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया गया। उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें की गईं और कई बार उन्हें दूसरों के सामने पेश कर अपमानित किया गया। बटुकों का कहना है कि यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था और सिर्फ दो नहीं बल्कि करीब 20 अन्य बटुक भी इसी तरह की प्रताड़ना का शिकार हुए हैं। उन्होंने बताया कि मठ परिसर में बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था, जिनमें प्रभावशाली और सफेदपोश लोग भी शामिल थे। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें चुप रहने की धमकी दी गई।
कानूनी कार्रवाई और केस का मोड़
मामले में आशुतोष महाराज नाम के व्यक्ति की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद और उनके एक शिष्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया। फिलहाल आरोपी पक्ष की ओर से सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिक गई हैं। अब यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या सच में कानून अपना काम कर पाएगा या मामला फिर से दबा दिया जाएगा।