Ram Mandir Theft: बंद कमरे में घंटों बैठी पुलिस, चंपत राय से उगलवाए कई राज; क्या 11 जुलाई की बैठक से पहले रफा-दफा हो जाएगा महापाप?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने पूर्व महासचिव चंपत राय से बंद कमरे में घंटों पूछताछ कर बयान दर्ज किए हैं। भारी दबाव के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा तो दे दिया है, लेकिन 11 जुलाई की बैठक तक फैसला टलने से मामले को दबाने की आशंका जताई जा रही है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 29 June 2026, 11:10 AM IST
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Ayodhya: रामनगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस पूरे प्रकरण के केंद्र में रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से पुलिस ने आखिरकार लंबी पूछताछ की है। कोतवाली पुलिस और जांच टीम ने बंद कमरे में घंटों बैठकर चंपत राय के बयान दर्ज किए हैं। इस दौरान दान की गिनती से लेकर सुरक्षा और बैंक ट्रांसफर से जुड़े कई तीखे सवाल दागे गए।

बंद कमरे में पूछताछ, बैंक अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की जांच टीम ने चंपत राय से बंद कमरे में बेहद गोपनीय तरीके से पूछताछ की। जांच अधिकारियों ने चढ़ावे के संग्रह (Collection), उसकी गिनती (Counting) और फिर बैंक में उसे जमा करने की पूरी चेन (Chain) को लेकर सवाल-जवाब किए। पुलिस ने इस मामले में ट्रस्ट के कुछ अन्य महत्वपूर्ण कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के उन अधिकारियों से भी पूछताछ होगी, जो दान की गिनती की निगरानी कर रहे थे।

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भारी दबाव के बाद ही चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

गौरतलब है कि जब से चढ़ावा चोरी का यह महापाप उजागर हुआ है, तब से महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा लगातार सवालों के घेरे में थे। लगभग 20 दिनों तक इस पूरे मामले में लीपापोती करने और इसे दबाने का प्रयास किया गया। दोनों ही जिम्मेदार पदाधिकारी अपना पद छोड़ने को तैयार नहीं थे। लेकिन जब जनता और संतों का दबाव हद से ज्यादा बढ़ गया, तब जाकर दोनों ने अपने इस्तीफे सौंपे। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी द्वारा जारी पत्र में इस बात की पुष्टि की गई थी।

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कार्रवाई में लगातार देरी, क्या मामला रफा-दफा करने की है तैयारी?

इस पूरे मामले में शुरुआत से ही जांच और कार्रवाई की रफ्तार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे पहले मामले को दबाने की कोशिश हुई, फिर बेहद मुश्किल से एसआईटी (SIT) बनी और घटना के 20 दिन बीत जाने के बाद एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। अब इस्तीफे को मंजूर करने की कार्रवाई को भी आगामी 11 जुलाई 2026 को होने वाली न्यास की बैठक तक के लिए टाल दिया गया है। अयोध्या के गलियारों में यह चर्चा बेहद आम है कि दो हफ्ते से ज्यादा का यह समय केवल इसलिए लिया गया है ताकि मामला पूरी तरह ठंडा हो जाए और इसे आसानी से रफा-दफा किया जा सके।

Location :  Ayodhya

Published :  29 June 2026, 11:10 AM IST

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