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महराजगंज के फरेंदा में अरविंद चौधरी की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। परिजन इसे हत्या बता रहे थे, जबकि पुलिस ने सीसीटीवी के आधार पर सड़क हादसा करार दिया है। पोस्टमार्टम में मिली चोटों और घटनाक्रम की उलझी कड़ियां मामले को और रहस्यमय बना रही थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश और संदेह का माहौल है।
पुलिस के बयान के बाद भड़क परिजन
Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज के फरेंदा क्षेत्र में 16 मार्च की शाम अरविंद चौधरी की जिंदगी की आखिरी शाम साबित हुई। परिजनों के मुताबिक, गांव के कुछ युवक उसे शराब पिलाने के बहाने अपने साथ ले गए थे। शुरुआत में यह एक सामान्य घटना लगी, लेकिन देर रात तक घर न लौटने पर परिवार की चिंता बढ़ गई।
करीब 11:30 बजे सूचना मिली कि अरविंद का शव हाईवे पर संदिग्ध हालत में पड़ा है। जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो शव की स्थिति देखकर उनके होश उड़ गए। घटनास्थल के हालात ने परिवार को यह मानने पर मजबूर कर दिया कि यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश हो सकती है।
घटना के बाद परिजनों ने पांच लोगों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया था जिसमें शेषमणि, राजबब्बर, उमानाथ, रामकेश और दुर्गेश शामिल थे। पुलिस ने 17 मार्च को मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
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18 मार्च को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को और जटिल बना दिया। रिपोर्ट में अरविंद के शरीर पर 13 गंभीर चोटों का उल्लेख था। यही चोटें विवाद का मुख्य आधार बन गई, परिजन इन्हें हमले का प्रमाण मान रहे हैं, जबकि पुलिस के लिए यह अब भी जांच का विषय था कि ये चोटें दुर्घटना की भी हो सकती हैं। उसी दिन अरविंद का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन सवालों का सिलसिला खत्म नहीं हुआ।
22 मार्च को मामले में बड़ा मोड़ आया, जब पुलिस ने परिजनों को थाने बुलाकर बताया कि अरविंद की मौत हत्या नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना में हुई है। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि तेज रफ्तार वाहन (नंबर यूपी 53 एफ. पी. 8586) की टक्कर से अरविंद की जान गई। इस खुलासे के बाद परिजन भड़क उठे और थाने पर हंगामा करने लगे। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि पैसे लेकर आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि शुरुआत से ही मामले को दबाने का प्रयास हो रहा था।
हालांकि पुलिस अपने दावे पर कायम है, लेकिन परिजन अब भी इसे साजिश मान रहे हैं। उनका तर्क है कि जिस तरह अरविंद को घर से बुलाया गया और जिस हालत में शव मिला, वह केवल सड़क हादसा नहीं हो सकता। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ एक परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि कानून व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।