फर्जी नाम, बदला पता और दर्जी का काम…28 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा नरसंहार का दोषी, नोएडा से दबोचा 6 लोगों की हत्या का आरोपी

फर्रुखाबाद के कायमगंज में 35 साल पुराने लखनपुर नरसंहार मामले में पुलिस ने 28 वर्षों से फरार चल रहे उम्रकैद के दोषी किशोरी लाल को नोएडा से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अपनी पहचान बदलकर खुद को दीपक बताया और नोएडा में दर्जी का काम कर रहा था। 1991 में एक ही परिवार के पांच सदस्यों और उनके पड़ोसी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 29 July 2026, 6:56 PM IST

Noida Desk: फर्रुखाबाद के कायमगंज कोतवाली पुलिस ने 35 साल पुराने चर्चित लखनपुर नरसंहार मामले में 28 वर्षों से फरार चल रहे दोषी किशोरी लाल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी जमानत पर रिहा होने के बाद वर्ष 1996 से फरार था और नोएडा में फर्जी नाम-पते से दर्जी का काम कर रहा था। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर उसे बिरियन तिराहे के पास से गिरफ्तार किया। सीओ राजेश कुमार द्विवेदी और प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान किशोरी लाल पुत्र नन्हें लाल निवासी लखनपुर के रूप में हुई है।

फर्जी नाम से नोएडा में रह रहा था आरोपी

पुलिस पूछताछ में किशोरी लाल ने बताया कि फरारी के दौरान उसने अपनी असली पहचान छिपा ली थी। वह खुद को दीपक पुत्र नन्दराम निवासी गगनपुरी निधौली कलां (एटा) बताकर रह रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी लंबे समय से नोएडा में फर्जी पहचान के सहारे दर्जी का काम कर रहा था।

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11 अगस्त 1991 की रात हुआ था नरसंहार

लखनपुर नरसंहार की घटना 11 अगस्त 1991 की रात की है। आरोप है कि लखनपुर गांव में गुलजारी लाल, उनकी पत्नी रामवती, उनके तीन बेटे राकेश, उमेश और धर्मेंद्र और पड़ोसी बाबूराम की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में गांव के श्रीकिशन, राम सेवक और किशोरी लाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद किशोरी लाल ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन बाद में जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

जिला अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया था। पीड़ित परिवार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

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चारपाई के नीचे छिपकर बची थी छह वर्षीय बच्चे की जान

मृतक गुलजारी लाल के बेटे मदन लाल ने बताया कि वारदात के समय उनकी उम्र करीब छह वर्ष थी। वह चारपाई के नीचे छिप गए थे, जिससे उनकी जान बच गई। मदन लाल ने कहा कि परिवार ने न्याय पाने के लिए वर्षों तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। इस दौरान मुकदमे की पैरवी में परिवार की करीब नौ बीघा जमीन तक बिक गई। किशोरी लाल की गिरफ्तारी के बाद परिवार ने वर्षों बाद न्याय और सुरक्षा का एहसास होने की बात कही है।

Location :  Noida

Published :  29 July 2026, 6:56 PM IST