चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय का बड़ा फैसला! 4 महीने अयोध्या नहीं छोड़ेंगे, रामलला की शरण में करेंगे विशेष साधना

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने चातुर्मास अयोध्या में बिताने का फैसला किया है। इस दौरान वे रामलला की शरण में रहकर साधना, मंत्र जाप और रामचरितमानस का पाठ करेंगे। मंदिर में प्रायश्चित पूजन भी जारी है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 18 July 2026, 2:40 PM IST
google-preferred

Ayodhya: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर से जुड़े चढ़ावा प्रकरण की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने बड़ा धार्मिक निर्णय लिया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 25 जुलाई से 21 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक चलने वाले चातुर्मास के पूरे चार महीने वे अयोध्या में ही रहेंगे और इस दौरान शहर से बाहर नहीं जाएंगे। बताया जा रहा है कि यह उनके जीवन का पहला चातुर्मास होगा, जिसे वे पूरी तरह रामलला की सेवा और साधना को समर्पित करेंगे।

रामलला की शरण में साधना और रामचरितमानस का पाठ

सूत्रों के अनुसार, चंपत राय 23 जून से राम मंदिर परिसर के निकट स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में एक प्रकार के एकांतवास में रह रहे हैं। इस दौरान वे प्रतिदिन लगभग चार घंटे साधना, मंत्र जाप और रामचरितमानस का नियमित पाठ कर रहे हैं। साथ ही सात्विक जीवनचर्या का पालन भी कर रहे हैं। धार्मिक दृष्टि से चातुर्मास को साधना और आत्मचिंतन का विशेष काल माना जाता है।

मंदिर में चल रहा नौ दिवसीय प्रायश्चित अनुष्ठान

श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा प्रकरण सामने आने के बाद मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार नौ दिवसीय प्रायश्चित पूजन कराया जा रहा है। गुप्त नवरात्र के अवसर पर 15 जुलाई से शुरू हुआ यह विशेष अनुष्ठान 23 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान भगवान श्रीराम से वैदिक विधि-विधान के साथ क्षमा-याचना की जा रही है और मंदिर परिसर का शुद्धिकरण भी कराया जा रहा है।

Road Accident: ससुराल की खुशियां पल भर में श्मशान में बदलीं: सोनभद्र हाईवे पर बाइक सवारों को बेरहमी से रौंदा, चीख उठे देखने वाले

70 वैदिक आचार्य करा रहे विशेष पूजन

विशेष अनुष्ठान में लगभग 70 वैदिक आचार्य शामिल हैं। राम मंदिर के गर्भगृह, यज्ञ मंडप और परकोटा स्थित शिव मंदिर में एक साथ वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि मंदिर परिसर में किसी भी अशुभ या अपवित्र मानी जाने वाली घटना के बाद शुद्धिकरण और प्रायश्चित के ऐसे अनुष्ठान आवश्यक होते हैं।

जिस पति ने दहेज में स्कॉर्पियो के लिए किया था पत्नी का मर्डर, उसी ने खुद को क्यों मारी गोली? जांच-पड़ताल में क्या आया सामने?

ट्रस्ट ने बताया अनुष्ठान का उद्देश्य

ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार इस विशेष अनुष्ठान का उद्देश्य भगवान श्रीराम के समक्ष क्षमा-याचना करना और मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा एवं पवित्रता को बनाए रखना है। अनुष्ठान में शामिल आचार्य विट्ठल ने कहा कि प्रायश्चित का वास्तविक अर्थ अपनी भूल स्वीकार करना और भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति न होने का संकल्प लेना है।

Location :  Ayodhya

Published :  18 July 2026, 12:42 PM IST

Related News

Advertisement