WhatsApp ग्रुप, फर्जी ट्रेडिंग और लाखों की चपत, बरेली पुलिस ने साइबर ठगों के चंगुल से निकाली पीड़ित की गाढ़ी कमाई

बरेली में ट्रेडिंग के जरिए भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से लाखों की ठगी का मामला सामने आया। पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने गहन जांच के बाद लाखों की रकम सफलतापूर्वक रिकवर कर पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दी।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 13 August 2026, 4:17 PM IST

Bareilly: बरेली में साइबर धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को ट्रेडिंग के जरिए भारी मुनाफे का लालच देकर 10.50 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। हालांकि साइबर क्राइम पुलिस की सक्रिय कोशिशों से पीड़ित को बड़ी राहत मिली। लगभग दस महीने की जांच के बाद, पुलिस ने ठगी गई रकम में से 8,62,365 रुपये सफलतापूर्वक वापस पा लिए और उन्हें मोहित रस्तोगी के बैंक खाते में लौटा दिया।

यह मामला बरेली कोतवाली इलाके के बिहारीपुर के रहने वाले मोहित रस्तोगी से जुड़ा है। मोहित को एक अनजान नंबर से WhatsApp मैसेज मिला। भेजने वाले ने दावा किया कि एक खास ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश करने पर कम समय में भारी मुनाफा कमाया जा सकता है।

ट्रेडिंग ग्रुप में शामिल करने के बाद बनाया निशाना

शुरुआती बातचीत के बाद, साइबर ठगों ने मोहित को एक ट्रेडिंग ग्रुप में शामिल कर लिया। ग्रुप में निवेश के जरिए लाखों रुपये कमाने के झूठे दावे वाले मैसेज अक्सर शेयर किए जाते थे। उनका भरोसा जीतने के लिए ठगों ने ट्रेडिंग के नकली आंकड़े और मुनाफे की जानकारी शेयर की। 

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धीरे-धीरे मोहित ठगों के जाल में फंस गया। उसे निवेश के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे जमा करने के लिए मनाया गया। जब तक उसे सच्चाई का पता चला तब तक उसके खाते से 10.50 लाख रुपये निकाले जा चुके थे।

17 अक्टूबर 2025 को शिकायत कराई गई दर्ज 

धोखाधड़ी का पता चलने पर मोहित ने अपने पैसे वापस पाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए 17 अक्टूबर 2025 को बरेली साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन से संपर्क किया।पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (धोखाधड़ी से संबंधित) और IT एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जाँच शुरू की। साइबर टीम ने बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन पेमेंट की पूरी कड़ी की जांच शुरू की।

साइबर पुलिस ने पैसे के लेन-देन का लगाया पता 

जांच ​​से पता चला कि ठगों ने पैसे को एक ही खाते में रखने के बजाय कई बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर कर दिया था। बैंक रिकॉर्ड और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन डेटा के आधार पर, साइबर पुलिस ने पैसे के लेन-देन के पूरे रास्ते का पता लगा लिया। लगातार जांच और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस ने 8,62,365 रुपये का पता लगाया। जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह रकम मोहित रस्तोगी के खाते में लौटा दी गई। हालांकि धोखाधड़ी की पूरी रकम अभी तक वापस नहीं मिल पाई है। पुलिस की जांच में पता चला कि बाकी रकम का कुछ हिस्सा एक गेमिंग ऐप से जुड़े ट्रांजैक्शन के जरिए ट्रांसफर किया गया था। साइबर पुलिस अब उस रकम का पता लगाने और उसे वापस पाने की कोशिश कर रही है।

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जांच के तार पश्चिम बंगाल से जुड़े

जांच के दौरान साइबर पुलिस टीम ने धोखाधड़ी के पीछे के नेटवर्क का पता लगाने का काम किया। पैसों के लेन-देन की जांच से पता चला कि मामला पश्चिम बंगाल से जुड़ा है, जहां दो स्थानीय लोगों की भूमिका सामने आई। पुलिस अब दोनों संदिग्धों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर रही है। कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी भी चल रही है।

साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जारी तलाश

इस मामले की जांच साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) धनंजय पांडे ने की। कॉन्स्टेबल विजय कुमार भी जांच टीम का हिस्सा थे। साइबर पुलिस अब आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ इस फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े अन्य अकाउंट और डिजिटल चैनलों की भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि बाकी रकम वापस पाने की कोशिशें जारी हैं।

Location :  Bareilly

Published :  13 August 2026, 4:17 PM IST