आगरा का खौफनाक हत्याकांड: संपत्ति के लालच में रिश्ते का कत्ल, बहन की हत्या करने वाले निक्कू को फांसी

आगरा में बहन की बेरहमी से हत्या करने वाले ललित चौधरी उर्फ निक्कू को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। संपत्ति विवाद के चलते उसने बहन पर छह गोलियां चलाई थीं। अदालत ने इसे बेहद क्रूर अपराध मानते हुए सख्त फैसला दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 June 2026, 1:15 PM IST

Agra: आगरा में रिश्तों को शर्मसार करने वाले हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बहन की बेरहमी से हत्या करने वाले ललित चौधरी उर्फ निक्कू को कोर्ट ने फांसी की सजा दी है। अदालत ने माना कि यह हत्या अचानक गुस्से में नहीं की गई थी, बल्कि आरोपी के मन में वर्षों से भरी रंजिश का नतीजा थी। संपत्ति विवाद के चलते भाई ने अपनी ही बहन को गोलियों से छलनी कर दिया था।

वसीयत में बहन का नाम आने से बढ़ी थी रंजिश

मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि शाहगंज निवासी यतेंद्र चौधरी के चार बच्चे थे। इनमें बेटे रूपेश और ललित चौधरी, जबकि बेटियां आरती और पूनम थीं। आरती की शादी हो चुकी थी, जबकि रूपेश की पहले ही मौत हो गई थी। रूपेश की पत्नी नीलू चौधरी भी परिवार के साथ रहती थीं। यतेंद्र चौधरी ने अपनी मौत से पहले 15 जून 2018 को अपनी संपत्ति की वसीयत बेटी पूनम चौधरी के नाम कर दी थी। यही बात ललित चौधरी को पसंद नहीं आई। वह अपनी बहन से अंदर ही अंदर नाराज रहने लगा और उसके मन में रंजिश बढ़ती चली गई।

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दुकान के किराए को लेकर भी चल रहा था विवाद

बताया गया कि निक्कू दुकान का किराया भी नहीं देता था। संपत्ति में हिस्सा मांग रही पूनम ने अपनी भाभी नीलू के साथ मिलकर दुकान पर ताला लगा दिया था। इससे आरोपी बुरी तरह नाराज हो गया था। इसी विवाद के बाद उसने खूनी वारदात को अंजाम दिया। उसने अपनी बहन पर एक के बाद एक छह गोलियां चला दीं। इसके बाद उसने भाभी नीलू को भी मारने की कोशिश की, लेकिन वह किसी तरह बचकर निकल गईं। घटना के बाद शाहगंज बाजार में अफरा-तफरी मच गई थी।

कोर्ट ने कहा- यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था

70 पेज के अपने आदेश में अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपनी बहन के चेहरे पर गोलियां मारीं। हत्या का तरीका उसकी मानसिकता को दर्शाता है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ हत्या नहीं थी, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते पर गहरा कलंक है। अदालत ने माना कि आरोपी ने पहले से प्रतिबंधित बोर की पिस्टल का इंतजाम कर रखा था। इससे साफ है कि घटना अचानक गुस्से में नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के मन में कई वर्षों से नफरत भरी हुई थी, जो आखिरकार इस घटना के रूप में सामने आई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी बताई क्रूरता

अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि मृतका के चेहरे पर कई गंभीर चोटें थीं। कोर्ट ने माना कि हत्या का तरीका इतना भयावह था कि अगर गोलियां बची होतीं तो शायद एकमात्र चश्मदीद गवाह नीलू चौधरी भी जिंदा नहीं बचतीं।

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ऑनलाइन हुई थी चश्मदीद की गवाही

इस मामले में नीलू चौधरी एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह थीं। आरोपी पक्ष के दबदबे और धमकियों के चलते वह कोर्ट आने से डर रही थीं। घटना के बाद से वह अपने मायके बुलंदशहर में रह रही थीं। उन्होंने सुरक्षा की मांग करते हुए कोर्ट में आवेदन दिया था। इसके बाद उनकी गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई।

चश्मदीद की गवाही बनी सजा का आधार

अदालत ने कहा कि घटना के समय मौके पर केवल तीन लोग मौजूद थे। आरोपी ललित, उसकी बहन पूनम और भाभी नीलू। अदालत ने माना कि नीलू की गवाही में कोई विरोधाभास नहीं था। जिरह के दौरान भी वह अपने बयान पर कायम रहीं। कोर्ट ने कहा कि चश्मदीद गवाह की गवाही आरोपी को सजा देने के लिए पर्याप्त है।

Location :  Agra

Published :  17 June 2026, 1:15 PM IST