Gold Price: क्यों रिकॉर्ड तोड़ रही सोने की कीमतें, क्या मिडिल क्लास के लिए ख्वाब बन जाएगा गोल्ड?

एक दशक पहले तक आम लोगों की ज्वेलरी का हिस्सा रहा सोना अब लग्जरी बन गया है। रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के चलते शादी-ब्याह और निवेश से दूर हो रहा है गोल्ड। मिडिल क्लास की पहुंच से तेजी से फिसल रहा है ये पारंपरिक धन।

Updated : 15 October 2025, 12:23 PM IST
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New Delhi: सोने की चमक दिन-ब-दिन और तेज होती जा रही है। एक ओर जहां इसकी मांग में पिछले 15 वर्षों से कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर कीमतें ऐसी ऊंचाइयों पर पहुंच चुकी हैं, जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गईं। इस साल अकेले सोने ने 50% से अधिक रिटर्न दिया है और यह अब 4,185 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया है। भारत में भी इसका असर साफ देखा जा रहा है, जहां 10 ग्राम सोने की कीमत अब ₹1.30 लाख को पार कर गई है।

कीमतें क्यों हो रही हैं रिकॉर्ड तोड़?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमत में आई इस उछाल के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण अमेरिका-चीन के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और इस साल के अंत तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती है। निवेशक अस्थिर वैश्विक हालात और मुद्रा बाजार की अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि सोना इस समय लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

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इतना ही नहीं, बीते तीन सालों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने भारी मात्रा में सोने की खरीद की है। 2022 से लेकर 2024 तक हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बताती है कि मई 2025 तक केंद्रीय बैंकों के पास आधिकारिक रूप से 36,344 टन सोना मौजूद है। इससे साफ है कि आने वाले समय में भी इनकी खरीदारी थमने वाली नहीं है।

डिमांड स्थिर, फिर भी क्यों उछाल?

हैरानी की बात यह है कि पिछले 15 वर्षों में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग स्थिर बनी हुई है और आपूर्ति में भी कोई बड़ी कमी नहीं आई है। बावजूद इसके, कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि मौजूदा सोने के भंडार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा अब केंद्रीय बैंकों के पास जमा हो गया है, जिससे मार्केट में सोने की उपलब्धता कम होती जा रही है।

Soaring Gold Prices

कहां थमेगा गोल्ड का तूफान?

इसके अलावा अमेरिका की डॉलर नीति भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है। आमतौर पर सोने और अमेरिकी डॉलर के बीच एक विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना सस्ता होता है और जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना महंगा होता है। इस साल डॉलर इंडेक्स में करीब 11% की गिरावट आई है, जो 1973 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। वर्तमान में डॉलर इंडेक्स 98.57 पर है, जिससे भी सोने को बल मिला है।

भारत में आम आदमी की पहुंच से दूर होता सोना

भारत में पारंपरिक रूप से सोने को निवेश और सामाजिक-सांस्कृतिक दोनों दृष्टिकोणों से अहम माना जाता है। लेकिन बढ़ती कीमतों ने मिडिल क्लास के लिए सोना खरीदना अब मुश्किल कर दिया है। 2010 में जहां 10 ग्राम सोना ₹40,000-₹50,000 के बीच मिलता था, वहीं अब यही सोना ₹1,30,000 के आंकड़े को पार कर चुका है। महज 10 महीनों में ही सोने की कीमत ₹77,000 प्रति 10 ग्राम से ₹1.3 लाख तक पहुंच चुकी है।

इस अभूतपूर्व तेजी ने निवेशकों को आकर्षित जरूर किया है, लेकिन आम जनता के लिए सोना अब एक ख्वाब बनता जा रहा है। विवाह, त्योहार और पारंपरिक अवसरों पर सोने की खरीदारी भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। लेकिन मौजूदा कीमतों पर यह सपना अब टूटता नजर आ रहा है।

क्या जल्द मिलेगी राहत?

फिलहाल सोने की कीमतों में ठहराव के संकेत नहीं मिल रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और डॉलर की कमजोरी जैसे कारक निकट भविष्य में भी बने रहने की संभावना है। यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व वाकई में ब्याज दरों में कटौती करता है, तो सोने की कीमतों में और उछाल आ सकता है।

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सोने की कीमतों में आई यह ऐतिहासिक तेजी यह निवेशकों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है, लेकिन आम जनता खासकर मिडिल क्लास के लिए सोना अब धीरे-धीरे एक लग्जरी बनता जा रहा है। आने वाले समय में यदि यही रुझान जारी रहा, तो पारंपरिक तौर पर "सुरक्षित निवेश" माने जाने वाला सोना आम लोगों की पहुंच से पूरी तरह बाहर हो सकता है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 15 October 2025, 12:23 PM IST

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