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भारतीय निर्वाचन आयोग ने सोमवार को दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया है। आयोग ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक कुमार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में आयोग के एक बड़े पद पर निर्वाचित किया है। चुनाव आयोग ने उन्हें तुरंत पदभार संभालने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली चुनाव आयोग को मिला मुख्य निर्वाचन अधिकारी
New Delhi: चुनाव आयोग ने सोमवार को आईएएस अशोक कुमार को दिल्ली का मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया है। वह आर. एलिश वाज की जगह लेंगे। सोमवार को निर्वाचन आयोग की तरफ से इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
चुनाव प्राधिकरण ने नए मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति के लिए तीन आईएएस अधिकारियों का पैनल मांगा था। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमें एजीएमयूटी कैडर के आईएएस अधिकारियों को दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जाता है।
चुनाव आयोग ने कहा कि अशोक कुमार को अपना नया पद तुरंत ग्रहण करना होगा और दिल्ली सरकार को एक सप्ताह के भीतर आयोग को अनुपालन रिपोर्ट भेजनी होगी।
जानकारी के अनुसार अशोक कुमार 2006 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। सोमवार को दिल्ली का मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। अशोक कुमार एजीएमयूटी कैडर के आईएएस हैं।
इस कैडर में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और विभिन्न केंद्र शासित प्रदेश शामिल होते हैं, इसलिए अधिकारियों को अलग-अलग भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलता है। इसी कारण AGMUT कैडर के अधिकारी बहुआयामी प्रशासनिक समझ और विविध क्षेत्रों में कार्यानुभव के लिए जाने जाते हैं।
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मूल रूप से राजस्थान के निवासी अशोक कुमार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से बीए तथा भूगोल विषय में स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) किया। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पॉलिटिकल जियोग्राफी में एमफिल की उपाधि प्राप्त की। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं पर उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है।
आयोग ने निर्देश दिए हैं कि पदभार संभालने के दौरान अशोक कुमार दिल्ली सरकार के अधीन कोई अन्य अतिरिक्त प्रभार नहीं संभाल सकेंगे। हालांकि, वे राज्य सचिवालय में चुनाव विभाग के प्रभारी सचिव के रूप में नामित रहेंगे, ताकि सरकार और चुनाव आयोग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
नए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) और आगामी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने की महत्वपूर्ण चुनौती होगी।