
हमले के बाद जंगल में पलट गई कहानी
West Champaran: बिहार के पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से सटे वाल्मीकि नगर वन क्षेत्र में गुरुवार को एक हैरान करने वाली घटना सामने आई। सुबह एक बुजुर्ग पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल करने वाला बाघ कुछ ही घंटों बाद जंगल की झाड़ियों में मृत अवस्था में मिला।
इस घटना ने वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी चौंका दिया है। फिलहाल बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और उसकी मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र से सटे बिसहा गांव के पास 65 वर्षीय अकलू यादव सुबह बकरियां चरा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में अकलू यादव के पैर में गंभीर चोटें आईं। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और लाठी-डंडों के सहारे किसी तरह उन्हें बाघ के चंगुल से छुड़ाया।
ग्रामीणों की भीड़ देखकर बाघ जंगल की ओर भाग गया। घायल बुजुर्ग को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना की सूचना मिलते ही वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
टीम ने बाघ के पदचिह्नों के आधार पर जंगल में सर्च अभियान शुरू किया। कुछ ही देर बाद बिसहा गांव के समीप जंगल की झाड़ियों में बाघ मृत अवस्था में मिला। इसके बाद वन विभाग ने पूरे इलाके को घेरकर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए कोतराहा स्थित कौशल विकास केंद्र भेज दिया।
वन संरक्षक सह निदेशक गौरव ओझा ने बताया कि बाघ की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद ही चल सकेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वरिष्ठ वन अधिकारियों की मौजूदगी में शव का परीक्षण कराया जा रहा है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघ के शरीर पर कई गहरे जख्म पाए गए हैं। शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि उसकी किसी दूसरे बाघ से भीषण भिड़ंत हुई होगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। वहीं, कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बुजुर्ग पर हमले के दौरान ग्रामीणों ने आत्मरक्षा में लाठी-डंडों से बाघ को खदेड़ा था, जिससे उसे चोटें आई होंगी। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल किसी इंसान को काटने या उसका खून लगने से बाघ की मौत नहीं हो सकती। यदि बाघ की मृत्यु हुई है तो उसके पीछे गंभीर चोट, संक्रमण, बीमारी या अत्यधिक शारीरिक तनाव जैसे कारण हो सकते हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा।
इस घटना के बाद वाल्मीकि नगर और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। वन विभाग ने लोगों से जंगल के किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने, अकेले खेतों या जंगल की ओर नहीं जाने तथा किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखने पर तुरंत विभाग को सूचना देने की अपील की है। विभाग का कहना है कि क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Location : West Champaran
Published : 30 July 2026, 10:44 PM IST