हिंदी
CJI सूर्यकांत ने पटना के सेमिनार में उठाई बड़ी आवाज (Img: X)
Patna: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को बच्चों में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर न्याय व्यवस्था और समाज के नजरिए में बदलाव की जरूरत बताई। पटना स्थित बिहार लोक भवन में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार “Restoring Childhood: Preventing Drug Abuse and Re-integration of Children in Need of Care and Protection” को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए किसी भी बच्चे की पहचान सिर्फ उसकी लत से नहीं होनी चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नशीले पदार्थों के सेवन के मुद्दे को सिर्फ आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। हर आंकड़े के पीछे एक ऐसा बच्चा होता है जिसके हालात, अनुभव और संघर्ष अलग-अलग होते हैं। किशोरों में नशीले पदार्थों के सेवन के बढ़ते खतरे पर अगस्त 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन का जिक्र करते हुए उन्होंने इन बच्चों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को ठीक से समझने के लिए उनके सामाजिक और पारिवारिक बैकग्राउंड की जांच करने के महत्व पर जोर दिया।
जज ने कहा कि जो लोग बच्चों को नशे की दुनिया में धकेलते हैं या ड्रग्स के वितरण में शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, न्याय प्रणाली को नशे की लत से जूझ रहे बच्चों के लिए अलग नजरिया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे की पूरी पहचान नशीले पदार्थों के सेवन का शिकार होने से तय नहीं होनी चाहिए; बल्कि ऐसे बच्चों को पुनर्वास, सहायता और समाज में फिर से शामिल होने के अवसर दिए जाने चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि बच्चों का पुनर्वास सिर्फ नशा-मुक्ति केंद्रों तक सीमित नहीं हो सकता। असली चुनौती उस माहौल में है जिसमें बच्चा इलाज के बाद लौटता है। उन्होंने शिक्षा, सुरक्षित पारिवारिक माहौल, भावनात्मक समर्थन और संस्थागत सहायता को पुनर्वास के अहम हिस्से बताया। उनके अनुसार, बच्चों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद करने के लिए भरोसे और सम्मान का माहौल जरूरी है।
यह भी पढ़ें - सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: छात्र को 5 लाख के मुचलके का नोटिस देने पर भड़के CJI, पूछा- “मजिस्ट्रेट ने हिम्मत कैसे की?”
CJI ने कहा कि बच्चों को सिर्फ देश का भविष्य नहीं माना जाना चाहिए; वे आज के नागरिक भी हैं और उनके अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी बच्चे को सिर्फ "एक केस नंबर," "एक बीमारी," या "बीती हुई गलती" के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। न्याय प्रणाली का मकसद यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि प्रभावित हर बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की राह मिले।
Location : Patna
Published : 29 September 2026, 1:29 PM IST