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बिहार के 5.5 लाख शिक्षकों की बढ़ सकती है सैलरी (IMG: Gemini)
Patna: बिहार के लाखों सरकारी शिक्षकों की नजर अब सरकार के उस फैसले पर टिकी है, जिसका सीधा असर उनकी सैलरी पर पड़ सकता है। अगर बिहार सरकार शिक्षकों के लिए 7वां वेतन आयोग और पे-मैट्रिक्स लागू करने की मांग मान लेती है, तो शिक्षकों की मासिक कमाई में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दावा किया जा रहा है कि पे-मैट्रिक्स, ग्रेड-पे और वेतन लेवल तय होने के बाद शिक्षकों की सैलरी में औसतन 15 हजार रुपये प्रति महीने तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
बिहार में करीब 5.5 लाख शिक्षक इस मांग से जुड़े हुए हैं। इनमें सक्षमता परीक्षा पास कर चुके विशिष्ट शिक्षक और नए बहाल विद्यालय अध्यापक भी शामिल हैं। शिक्षक लंबे समय से राज्य सरकार के दूसरे कर्मचारियों की तरह 7वें वेतनमान का लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। अब इस मांग को लेकर शिक्षक संगठनों ने सरकार को ज्ञापन सौंपने के साथ आंदोलन का ऐलान भी किया है।
शिक्षकों की मांग है कि उन्हें भी राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह पे-मैट्रिक्स के तहत वेतन दिया जाए। अगर सरकार इस व्यवस्था को लागू करती है तो शिक्षकों के वेतन का निर्धारण संबंधित पे-लेवल और ग्रेड के आधार पर किया जा सकता है। इसी बदलाव की वजह से शिक्षकों की मौजूदा सैलरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, औसतन करीब 15 हजार रुपये प्रति माह तक की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
7वें वेतनमान का असर केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। अगर पे-मैट्रिक्स लागू होता है तो इसके साथ महंगाई भत्ता यानी DA, मकान किराया भत्ता यानी HRA और मेडिकल जैसी सुविधाओं में भी बदलाव हो सकता है। इसका मतलब यह है कि शिक्षकों की कुल मासिक आय में केवल बेसिक पे की वजह से ही नहीं, बल्कि अलग-अलग भत्तों के कारण भी अंतर आ सकता है। हालांकि इन भत्तों की वास्तविक राशि सरकार की ओर से तय किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगी।
बिहार में करीब 5.5 लाख शिक्षकों के इस मांग से प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इनमें सक्षमता परीक्षा पास कर चुके विशिष्ट शिक्षक और नए बहाल विद्यालय अध्यापक भी शामिल हैं। शिक्षकों का तर्क है कि जब उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा दिया जा चुका है तो फिर उन्हें 7वें वेतनमान के लाभ से अलग क्यों रखा जाए। इसी सवाल को लेकर शिक्षक संगठन लगातार सरकार के सामने अपनी मांग रख रहे हैं।
अगर बिहार सरकार शिक्षकों के लिए 7वें वेतनमान की मांग स्वीकार करती है तो इसका सीधा असर राज्य के सरकारी खजाने पर भी पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक, सरकार पर सालाना 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के वेतन ढांचे में बदलाव होने की वजह से राज्य सरकार को इसके लिए बड़ी अतिरिक्त राशि की व्यवस्था करनी होगी। इसलिए यह फैसला सिर्फ शिक्षकों की सैलरी से जुड़ा नहीं है, बल्कि राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा।
7वें वेतनमान की मांग को लेकर शिक्षक संगठन सरकार के सामने अपनी बात रख चुके हैं। संगठनों की ओर से सरकार को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों को पे-मैट्रिक्स और 7वें वेतनमान का लाभ देने की मांग की गई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब दूसरे राज्य कर्मचारियों को वेतन आयोग के तहत वेतन और भत्तों का लाभ मिल रहा है तो शिक्षकों के मामले में भी समान व्यवस्था होनी चाहिए।
इस मांग को लेकर अब आंदोलन की तैयारी भी शुरू हो गई है। शिक्षक संगठनों ने 2 अक्टूबर से पटना में आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन सकता है।
अगर 7वें वेतनमान और पे-मैट्रिक्स के लागू होने के बाद औसतन 15 हजार रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी होती है तो सालभर में एक शिक्षक की आय में करीब 1.80 लाख रुपये का अंतर पड़ सकता है। हालांकि यह सिर्फ उपलब्ध अनुमान के आधार पर गणना है और वास्तविक वेतन वृद्धि सरकार की ओर से तय नियमों के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके अलावा DA, HRA और मेडिकल जैसे भत्तों में बदलाव होता है तो कुल वेतन में और अंतर आ सकता है।
Location : Patna
Published : 7 September 2026, 5:51 PM IST