बाइक पर एक तरफ पैर रखकर क्यों बैठती हैं महिलाएं?

बाइक पर महिलाओं के एक तरफ पैर रखकर बैठने की आदत का संबंध भारतीय संस्कृति से नहीं, बल्कि मध्यकालीन यूरोप की शाही घुड़सवारी परंपरा से है। ब्रिटिश काल में यह सोच भारत आई। पहनावे और सामाजिक धारणाओं के कारण यह आदत आज टू-व्हीलर्स पर भी बदस्तूर जारी है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 21 June 2026, 3:40 PM IST
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New Delhi: भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया की सड़कों पर यह एक बेहद आम नजारा है। जब भी कोई महिला किसी मोटरसाइकिल या स्कूटर पर पीछे बैठती है, तो वह अमूमन दोनों पैर एक ही तरफ (साइड-सैडल) करके बैठती है। हम सब इस दृश्य को बचपन से देखते आ रहे हैं और इसे भारतीय संस्कृति या कपड़ों की सहूलियत से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महिलाओं के इस तरह बैठने के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण या भारतीय परंपरा नहीं है? इसका असली कनेक्शन सदियों पुराने यूरोपीय राजघरानों और ब्रिटिश हुकूमत के एक कड़े सामाजिक नियम से जुड़ा है, जो आज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

यूरोप के शाही घरानों से शुरू हुआ था यह 'ट्रेंड'

इतिहासकारों और सांस्कृतिक शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अनोखी आदत की शुरुआत हमारे देश में नहीं, बल्कि मध्यकालीन यूरोप में हुई थी। उस दौर में राजघरानों की ऊंचे तबके की महिलाएं जब घोड़ों पर सवारी करती थीं, तो उनके लिए पुरुषों की तरह दोनों तरफ पैर फैलाकर बैठना सामाजिक रूप से 'अशोभनीय' और 'अमर्यादित' माना जाता था। शाही महिलाओं के लिए भारी-भरकम गाउन और स्कर्ट पहनकर शालीन दिखने के लिए 'साइड-सैडल राइडिंग' (एक तरफ पैर रखकर बैठना) का नियम बनाया गया। बोहेमिया की रानी एन (Anne of Bohemia) जैसी ऐतिहासिक हस्तियों ने इस चलन को पूरी दुनिया के कुलीन समाजों में मशहूर कर दिया था।

अंग्रेजों के साथ भारत आई यह औपनिवेशिक आदत

जब भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार हुआ, तो अंग्रेज अपने साथ सिर्फ कानून ही नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली और सामाजिक रूढ़ियां भी लेकर आए। भारतीय एलीट क्लास और धीरे-धीरे आम समाज ने भी अंग्रेजों की इस 'शालीनता' वाली परिभाषा को अपना लिया। बाद के दशकों में जब घोड़ों की जगह टू-व्हीलर यानी मोटरसाइकिल और स्कूटर ने ली, तो बैठने का यह अंदाज भी घोड़ों से शिफ्ट होकर सीधे गाड़ियों की पिछली सीट पर आ गया।

रानी लक्ष्मीबाई की विरासत बनाम सामाजिक सोच

दिलचस्प बात यह है कि प्राचीन भारतीय इतिहास इस यूरोपीय सोच से बिल्कुल उलट कहानी बयां करता है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसी महान वीरांगनाएं पुरुषों की तरह ही दोनों तरफ पैर रखकर (Astride) घुड़सवारी करती थीं और युद्ध लड़ती थीं। इससे साफ है कि भारतीय समाज में महिलाएं इस तरह बैठने में पूरी तरह सहज थीं, लेकिन औपनिवेशिक प्रभाव और बाद में साड़ी व सलवार-सूट जैसे पारंपरिक पहनावे के कारण 'एक तरफ पैर रखना' ही समाज में सबसे ज्यादा स्वीकार्य और संस्कारी मान लिया गया।

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साड़ी-गार्ड का तकनीकी आविष्कार

इस सामाजिक आदत का असर ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग पर इस कदर पड़ा कि भारत में बिकने वाली हर बाइक में बाईं तरफ 'साड़ी-गार्ड' और 'लेडीज फुटरेस्ट' लगाना कानूनन अनिवार्य कर दिया गया, जो दुनिया के अन्य देशों की बाइक्स में नहीं होता है।

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सुरक्षा बनाम संतुलन का खतरा

ऑटोमोबाइल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि साइड-सैडल (एक तरफ) बैठना बेहद खतरनाक है। अचानक ब्रेक लगने या मोड़ पर बाइक का संतुलन बिगड़ने पर एक तरफ बैठी महिला के गिरने की आशंका 80% अधिक होती है, जबकि दोनों तरफ पैर रखकर बैठने से ग्रिप मजबूत रहती है।

Location :  New Delhi

Published :  21 June 2026, 3:40 PM IST

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