‘यह है मेरी असली कमाई…’ नाथूला बॉर्डर पर फौजी छात्र से मिलकर भावुक हुई शिक्षिका, वीडियो जीत रहा सोशल मीडिया का दिल

14200 फीट ऊंचे नाथूला दर्रे पर देश की रक्षा में तैनात एक आर्मी जवान ने जब अपनी पुरानी शिक्षिका को पहचाना, तो दोनों भावुक हो गए। शिक्षिका ने कहा- "लोग कहते हैं टीचिंग में क्या रखा है, पर यह जवान ही मेरी असली कमाई है।" देखें यह दिल छू लेने वाला वीडियो।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 July 2026, 1:24 PM IST

New Delhi: पैसा तो हर कोई कमा लेता है, लेकिन सम्मान और गर्व की जो पूंजी एक शिक्षक कमाता है, उसकी कोई कीमत नहीं होती। इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा एक नया वीडियो इसी बात की गवाही देता है, जिसे देखकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं।

यह कहानी एक शिक्षिका और उनके एक पुराने छात्र की है, जिनकी मुलाकात किसी आम जगह पर नहीं, बल्कि देश की सीमा पर बर्फीले और ऊंचे पहाड़ों के बीच हुई। इस अद्भुत और अप्रत्याशित मुलाकात ने इंटरनेट पर लाखों लोगों का दिल जीत लिया है।

14,200 फीट की ऊंचाई पर नाथूला दर्रे के पास हुई अनोखी मुलाकात

वायरल वीडियो के शुरुआती दृश्यों में एक महिला (शिक्षिका) बेहद गर्व और उत्साह के साथ कैमरे के सामने आकर कहती हैं, "देखिए दोस्तों, नाथूला के पास मेरा पढ़ाया हुआ बच्चा मिला है।" वीडियो में उनके साथ भारतीय सेना की वर्दी में तैनात एक युवा जवान खड़ा दिखाई देता है, जिसके चेहरे पर अपनी गुरु को देखकर एक बेहद प्यारी और सम्मानजनक मुस्कान तैर रही है।

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यह भावुक पल सिक्किम के प्रसिद्ध नाथूला दर्रे के पास का है, जो समुद्र तल से लगभग 14,200 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है। इतनी दुर्गम और बर्फीली जगह पर अपनी मातृभूमि की रक्षा में तैनात पुराने छात्र को वर्दी में देखना किसी भी शिक्षक के लिए जीवन का सबसे बड़ा और भावुक क्षण हो सकता है।

'लोग कहते हैं क्या है टीचिंग जॉब में, तो यह है मेरी असली कमाई'

वीडियो में शिक्षिका बेहद गर्व से भरी आवाज़ में उन लोगों को जवाब देती हैं जो इस पेशे को छोटा समझते हैं। वह कहती हैं, "लोग कहते हैं न कि क्या रखा है टीचिंग की नौकरी में, तो देख लीजिए, यह है इस काम की असली ताकत। यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी कमाई है।"

इस मुलाकात की सबसे खूबसूरत और खास बात यह थी कि उस जवान ने खुद अपनी शिक्षिका को इतनी भीड़ और भारी सुरक्षा जैकेटों के बीच पहचान लिया था। शिक्षिका आगे कहती हैं कि उनका यह छात्र इतनी कठिन और कष्टकारी परिस्थितियों में देश की सेवा कर रहा है, इसके बावजूद वह अपने पुराने दिनों और अपनी गुरु को नहीं भूला।

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डांट-फटकार नहीं, जवान को याद रहा गुरु का अनुशासन

बातचीत के दौरान माहौल को थोड़ा हल्का करने के लिए शिक्षिका मुस्कुराते हुए अपने छात्र से पुरानी यादें ताजा करती हैं। वह कहती हैं, "तुमको... सॉरी अब तो आप देश के जवान हैं, तो आपको पहले हम स्कूल में बहुत डांटते होंगे ना? अच्छा यह बताओ कि तुमको मेरी कौन सी बात सबसे ज्यादा याद है?"

इस पर देश की रक्षा में मुस्तैद वह जवान बेहद शालीनता और आदर के साथ जवाब देता है, "मैम, मुझे आपका अनुशासन (डििसप्लीन) याद है।" जवान का यह जवाब सुनकर शिक्षिका भावुक होकर हंस पड़ती हैं और कहती हैं, "चलो, अच्छा है तुम्हें मेरी डांट याद नहीं रही, बल्कि अनुशासन याद रहा।"

Location :  New Delhi

Published :  4 July 2026, 1:24 PM IST