गोरखपुर के उनवल स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है। हाल ही में मंदिर परिसर में पीपल, बरगद और बेल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की पहल की गई।

Gorakhpur: यूपी के गोरखपुर मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित उनवल का नीलकंठ महादेव मंदिर आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। लगभग 400 वर्ष पुराने इस शिवालय से जुड़ी कई चमत्कारी कथाएं प्रचलित हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां कभी घना जंगल था और बार-बार सर्पों का जोड़ा दिखाई देता था। इसे भगवान शिव का संकेत मानते हुए यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया, जो समय के साथ प्रसिद्ध तीर्थस्थल बन गया।
मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला लगता है। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं। हाल ही में चेयरमैन प्रतिनिधि मिंटू दुबे ने मंदिर परिसर में पीपल, बरगद और बेल के पौधे रोपे। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Gorakhpur: यूपी के गोरखपुर मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित उनवल का नीलकंठ महादेव मंदिर आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। लगभग 400 वर्ष पुराने इस शिवालय से जुड़ी कई चमत्कारी कथाएं प्रचलित हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां कभी घना जंगल था और बार-बार सर्पों का जोड़ा दिखाई देता था। इसे भगवान शिव का संकेत मानते हुए यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया, जो समय के साथ प्रसिद्ध तीर्थस्थल बन गया।
मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला लगता है। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं। हाल ही में चेयरमैन प्रतिनिधि मिंटू दुबे ने मंदिर परिसर में पीपल, बरगद और बेल के पौधे रोपे। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।