देहरादून के विकासनगर में नेशनल हाईवे के प्रस्तावित नए रूट का विरोध तेज हो गया है। लेहमन चौक से चाय बागान तक एलिवेटेड रोड बनाने के प्रस्ताव पर वकीलों और स्थानीय लोगों ने पर्यावरण और प्राचीन शिव मंदिर को नुकसान का हवाला देते हुए जन आंदोलन की चेतावनी दी है।

विकासनगर में हाईवे को लेकर नया विवाद
Dehradun: उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र में नेशनल हाईवे निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रस्तावित रूट को लेकर स्थानीय लोगों और वकीलों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि लेहमन चौक से बार एसोसिएशन के चेंबर और चाय बागान की ओर एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव पर्यावरण और धार्मिक आस्था दोनों के लिए नुकसानदायक होगा।
जानकारी के अनुसार नेशनल हाईवे निर्माण के लिए दो स्थान प्रस्तावित किए गए हैं। पहला विकल्प विकासनगर के मेन बाजार से होकर गुजरने वाला है, जो पहले से ही नेशनल हाईवे पर स्थित है। दूसरा प्रस्ताव लेहमन चौक से बार एसोसिएशन वकीलों के चेंबर और चाय बागान की ओर एलिवेटेड रोड बनाने का है। इसी दूसरे प्रस्ताव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
स्थानीय अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने प्रस्तावित रूट का विरोध करते हुए कहा कि यदि चाय बागान क्षेत्र से एलिवेटेड नेशनल हाईवे बनाया गया तो हजारों पेड़ों का कटान होगा। उन्होंने इसे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया। उनके अनुसार यह क्षेत्र हरित पट्टी के रूप में जाना जाता है और यहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संतुलन प्रभावित होगा।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि चाय बागान क्षेत्र में एक प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है। आरोप है कि यदि हाईवे का निर्माण इसी रूट से किया गया तो मंदिर को नुकसान पहुंच सकता है या उसे हटाना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए सरकार से रूट बदलने की मांग की है।
प्रवीण कुमार एडवोकेट
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि पूर्व में पारित प्रस्ताव के अनुसार विकासनगर मेन बाजार से ही एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जब मुख्य बाजार पहले से ही हाईवे पर स्थित है तो नए रूट की आवश्यकता नहीं है। इससे न तो पेड़ों की कटाई होगी और न ही धार्मिक स्थल को कोई नुकसान पहुंचेगा।
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एडवोकेट प्रवीण कुमार और अन्य स्थानीय लोगों ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने लेहमन चौक से चाय बागान वाले रूट पर काम आगे बढ़ाया तो वे व्यापक जन आंदोलन करेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जनता की भावनाओं और पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं और स्थानीय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।