
निठारी कांड का आरोपी सुरेंद्र कोली (Source: X)
Haridwar: कभी निठारी कांड की वजह से देशभर में सुर्खियों में आया सुरेंद्र कोली जिंदगी के आखिरी दौर में हरिद्वार की गलियों में चाय बेच रहा था। अल्मोड़ा से रोजगार की तलाश में दिल्ली पहुंचने, निठारी कांड में नाम आने और वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद उसकी जिंदगी हरिद्वार में एक छोटी सी चाय की दुकान तक पहुंची। अब इसी दुकान में उसकी संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुरेंद्र कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के मंगरूखाल गांव का रहने वाला था। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह वर्ष 2004-05 के आसपास रोजगार की तलाश में दिल्ली पहुंचा था। यहां उसने मनिंदर सिंह पंधेर के यहां काम करना शुरू किया।
इसके कुछ समय बाद वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी में हत्या और दुष्कर्म के मामले सामने आए। इस मामले की जांच के दौरान सुरेंद्र कोली का नाम सामने आया और इसके बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
निठारी कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले में सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया और अलग-अलग मुकदमों में उसके खिलाफ कार्रवाई चली। एक मामले में उसे फांसी की सजा भी सुनाई गई थी।
बाद में वर्ष 2015 में उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। इसके बाद भी अलग-अलग मामलों में कानूनी लड़ाई जारी रही। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े अंतिम लंबित मामले में भी सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया।
कानूनी मामलों से राहत मिलने के बाद सुरेंद्र कोली कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था। हालांकि, वह हरिद्वार कब आया और यहां आने की वजह क्या थी, इसे लेकर पुलिस की जांच अभी जारी है।
हरिद्वार में उसने सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने एक चाय का खोखा किराए पर लिया था। वह इसी दुकान से चाय बेचकर अपना गुजारा कर रहा था।
यानी जिस व्यक्ति का नाम कभी देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में आया था, वह अपने जीवन के आखिरी दौर में एक छोटी सी चाय की दुकान चला रहा था।
शहर कोतवाली की सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिली कि लालमाता मंदिर के सामने चाय की दुकान में एक व्यक्ति ने फांसी लगा ली है। पुलिस मौके पर पहुंची तो सुरेंद्र कोली का शव रस्सी के सहारे फंदे पर लटका मिला।
पुलिस ने शव की पहचान के बाद अल्मोड़ा में रहने वाले उसके स्वजन को सूचना दी। दुकान से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
पुलिस की शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन सुसाइड नोट नहीं मिलने के कारण जांच हर एंगल से की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि मौत से पहले उसकी गतिविधियां कैसी थीं और हाल के दिनों में वह किन लोगों के संपर्क में था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। फिलहाल निठारी कांड से हरिद्वार की चाय की दुकान तक पहुंची सुरेंद्र कोली की कहानी का आखिरी अध्याय भी कई सवाल छोड़ गया है।
Location : Haridwar
Published : 18 September 2026, 2:02 PM IST