रामनगर में भोजन माताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा, वेतन बढ़ोतरी और हटाई गई भोजन माताओं की बहाली की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।

सरकार के खिलाफ एकजुट हुई भोजन माताएं
Ramnagar: उत्तराखंड के रामनगर में सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोजन माताएं सड़कों पर उतर आईं। प्रदेश सरकार पर उपेक्षा और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए भोजन माताओं ने जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। इस दौरान एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी भेजा गया।
प्रदर्शन से पहले लखनपुर स्थित सहित पार्क में भोजन माता संगठन की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में भोजन माताएं शामिल हुईं। वक्ताओं ने सरकार से जल्द उनकी मांगें पूरी करने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बैठक के बाद भोजन माताओं ने लखनपुर से तहसील परिसर तक पैदल मार्च निकाला। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहीं भोजन माताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।
भोजन माता संगठन की अध्यक्ष शारदा देवी ने कहा कि भोजन माताएं वर्षों से स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का कार्य कर रही हैं, लेकिन उन्हें आज तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला। उन्होंने मांग की कि भोजन माताओं को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित किया जाए ताकि उन्हें भी अन्य कर्मचारियों की तरह सुविधाएं मिल सकें।
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शारदा देवी ने बताया कि कई स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने का हवाला देकर भोजन माताओं को बाहर कर दिया गया है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि सभी हटाई गई भोजन माताओं को तत्काल वापस लिया जाए और उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रदर्शन के दौरान यह भी मांग उठाई गई कि स्कूलों में बाहर से आने वाले भोजन को बंद किया जाए। संगठन का कहना है कि इससे न केवल भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, बल्कि भोजन माताओं के रोजगार पर भी संकट पैदा हो रहा है।
मांगे पूरी न होने पर हड़ताल की चेतावनी
भोजन माता संगठन ने सरकार द्वारा घोषित 5000 रुपये न्यूनतम वेतन को तुरंत लागू करने की मांग की। इसके साथ ही भोजन माताओं को 18,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिए जाने की भी मांग की गई। संगठन का कहना है कि महंगाई के इस दौर में मौजूदा मानदेय में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
शारदा देवी ने कहा कि सोमवार को भोजन माताओं ने एक दिन की हड़ताल की है। यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इसके लिए पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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भोजन माता संगठन की अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि अब भोजन माताएं अपना उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेंगी। उन्होंने सरकार से संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की।