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नैनीताल ’64 शक्तिपीठों’ में से एक है। कहा जाता है कि देवी सती की बाईं आंख यहीं गिरी थी और नैना देवी को क्षेत्र की रक्षक माना जाता है। झील के उत्तरी किनारे स्थित मंदिर आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। इसी कारण पहले इस जगह का नाम ‘नैन-ताल’ पड़ा, जो बाद में नैनीताल बन गया।
नैनीताल '64 शक्तिपीठों' में से एक है। कहा जाता है कि देवी सती की बाईं आंख यहीं गिरी थी और नैना देवी को क्षेत्र की रक्षक माना जाता है। झील के उत्तरी किनारे स्थित मंदिर आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। इसी कारण पहले इस जगह का नाम ‘नैन-ताल’ पड़ा, जो बाद में नैनीताल बन गया।