i love nainital

1839 में अंग्रेज व्यापारी पी. बैरन यहां पहुंचे और नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता देखकर मोहित हो गए। उन्होंने स्थानीय व्यापारी नूरसिंह से भूमि खरीदने की कोशिश की, जिसे नूरसिंह ने पहले मना कर दिया। बाद में नौकायन के दौरान दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर राज़ी किया गया। 1842 में शहर में पहला कॉटेज ‘पिलग्रिम’ बना। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने पूरे क्षेत्र को व्यवस्थित नगर का रूप दिया।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 18 November 2025, 2:20 PM IST
google-preferred

Published : 
  • 18 November 2025, 2:20 PM IST

Advertisement
Advertisement