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नैनीताल की खुर्पाताल झील अपने बदलते रंग और रहस्यमयी सौंदर्य के लिए मशहूर है। स्थानीय मान्यताओं और विज्ञान के चलते यह झील सालभर पर्यटकों को आकर्षित करती है।
खुर्पाताल की अनोखी पहचान
Nainital: नैनीताल से लगभग 12 किलोमीटर दूर जंगलों की गोद में बसी खुर्पाताल झील अपनी रहस्यमयी और अनोखी खूबसूरती के लिए मशहूर है। हालांकि नैनी झील, भीमताल और सातताल जैसी झीलें अधिक प्रसिद्ध हैं, लेकिन खुर्पाताल की खासियत इसकी बदलती रंगत है। यह झील सालभर में कई बार अपना रंग बदलती है, जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि झील का हल्का लाल रंग किसी अनहोनी का संकेत है, जबकि मार्च के महीने में दिखाई देने वाला गहरा हरा रंग सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस झील का रंग मौसम और प्राकृतिक घटनाओं के अनुसार बदलता रहता है, जिससे यह अन्य झीलों से अलग और रहस्यमयी बन जाती है।
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मार्च और अप्रैल में झील के चारों ओर मौजूद पाइन के पेड़ों से गिरने वाले फूल झील की सतह पर फैल जाते हैं, जिससे पानी का रंग हल्का और बदलता नजर आता है। वहीं चारों ओर फैले ऊँचे पेड़ अपनी छाया झील पर डालते हैं, जिससे पानी में हरापन दिखाई देता है। यही कारण है कि पर्यटक और फोटोग्राफर्स खुर्पाताल को अक्सर रंग-बिरंगी झील के रूप में देखकर हैरान रह जाते हैं।
इस रहस्यमयी बदलाव के पीछे केवल मान्यताएं ही नहीं, बल्कि विज्ञान भी है। झील में करीब 35 से 40 प्रजातियों के शैवाल (एल्गी) पाए जाते हैं। जब ये एल्गी अपने बीज छोड़ते हैं और सूरज की रोशनी पानी में पड़ती है, तो विभिन्न रंग दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्राकृतिक और जैविक प्रक्रिया खुर्पाताल को सालभर रंग-बिरंगा बनाती है।
खुर्पाताल झील का शांत वातावरण और बदलते रंग इसे पर्यटकों के लिए खास बनाते हैं। झील के आसपास का जंगल, ऊँचे पेड़ और प्राकृतिक ध्वनियां इसे ट्रेकिंग और फोटोग्राफी के लिए आदर्श स्थल बनाती हैं। यहाँ हर मौसम अपनी अलग छटा छोड़ता है और पर्यटकों को प्रकृति का अद्भुत अनुभव मिलता है।
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स्थानीय लोग इसे केवल प्राकृतिक घटना नहीं मानते। उनका विश्वास है कि झील का रंग भविष्य के संकेत देता है। हल्का लाल रंग किसी अनहोनी का इशारा है और गहरा हरा रंग खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है। यह मान्यता वर्षों से चली आ रही है और झील की रहस्यमयी छवि को और मजबूत करती है।