रुद्रप्रयाग DM ने ली समीक्षा बैठक: शीतलहर और वन्य जीव से होने वाले नुकसान पर अलर्ट, जानें क्या है महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने शीतलहर और वन्य जीवों से होने वाले नुकसान पर समीक्षा बैठक की। अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने और लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क को तेज करने के निर्देश दिए। सभी विभागों को जनता की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने को कहा गया।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 3 January 2026, 4:15 PM IST
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Rudraprayag: जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने शनिवार को जिला कार्यालय के एनआईसी सभागार में जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ शीतलहर और वन्य जीवों से होने वाले नुकसान की समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले के सभी संबंधित विभागों के प्रमुख मौजूद थे।

क्या है बैठक का उद्देश्य ?

बैठक का उद्देश्य शीतलहर के दौरान जनजीवन को प्रभावित करने वाले पहलुओं की पहचान करना और वन्य जीवों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए रणनीति तैयार करना था। इसके साथ ही लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क की प्रगति पर भी चर्चा की गई।

अधिकारियों को निर्देश जारी

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अलर्ट मोड पर रहें और किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सर्दियों में शीतलहर और वन्य जीवों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा।

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शीतलहर से जनजीवन पर प्रभाव

जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में शीतलहर के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करें और आवश्यक राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तैयार रहें।

उन्होंने कहा कि सर्दियों में तापमान में गिरावट से सड़क मार्ग, बिजली आपूर्ति, जल स्रोत और लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए, समय पर राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

वन्य जीवों से होने वाले नुकसान की समीक्षा

बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने शीतलहर और अन्य प्राकृतिक कारणों से वन्य जीवों को होने वाले नुकसान की स्थिति प्रस्तुत की। जिलाधिकारी ने वन्य जीवों के सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए दिशा-निर्देश दिए।

शीतलहर और वन्य जीव सुरक्षा को लेकर बैठक

उन्होंने कहा कि वन्य जीवों की सुरक्षा में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। विशेष रूप से सर्दियों में भोजन और पानी की कमी के कारण जंगली जानवर इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में अधिकारियों को निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त तेज करने की आवश्यकता है।

लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क की समीक्षा

जिलाधिकारी ने लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क की प्रगति पर भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कार्यों को समय पर पूरा करने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित उपाय सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रहें।

उन्होंने कहा कि लैंडस्लाइड रोकथाम कार्य केवल तकनीकी उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता को भी जागरूक किया जाना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में समय पर चेतावनी प्रणाली लागू करना आवश्यक है।

जनता की सुरक्षा के लिए सतर्कता

जिलाधिकारी ने सभी विभागों को जनता की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित विभागों को एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए। मौसम की गंभीर परिस्थितियों में समय पर कदम उठाने से नुकसान कम किया जा सकता है।

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अधिकारियों को दिए गए मुख्य निर्देश

1. शीतलहर प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट मोड पर रहें।
2. वन्य जीवों की गतिविधियों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाएं।
3. लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क को समय पर पूरा करें।
4. जनता को सुरक्षित मार्ग और राहत केंद्रों की जानकारी दें।
5. विभागों के बीच समन्वय और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें।

Location : 
  • Rudraprayag

Published : 
  • 3 January 2026, 4:15 PM IST

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