नैनीताल के खुर्पाताल क्षेत्र में शराब की दो नई दुकानों के प्रस्ताव के खिलाफ महिलाओं ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया है। मंगोली और बज़ून गांव में रातभर धरना और सड़क जाम के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शराब का कारोबार किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है।

शराब के खिलाफ सड़कों पर उतरी महिलाएं
Nainital: पहाड़ों की शांति को उस वक्त जैसे किसी ने तोड़ दिया, जब शराब की दो नई दुकानों की खबर ने पूरे इलाके में आग लगा दी। रात का सन्नाटा नारों में बदल गया, और गांव की महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। गुस्सा इतना था कि पूरी रात धरना चलता रहा, और सुबह होते-होते विरोध उग्र रूप ले चुका था। सवाल सिर्फ दुकानों का नहीं, बल्कि गांव की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों का था।
नैनीताल के खुर्पाताल न्याय पंचायत क्षेत्र में शराब की दो नई दुकानों के प्रस्ताव ने ग्रामीणों के बीच भारी नाराज़गी पैदा कर दी है। मंगोली और बज़ून गांव में दुकानें खोले जाने की सूचना मिलते ही लोगों, खासकर महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। उनका साफ कहना है कि गांव का माहौल खराब करने वाली किसी भी चीज़ को वे बर्दाश्त नहीं करेंगी।
विरोध की अगुवाई महिलाओं ने की। मंगोली और बज़ून में प्रस्तावित दुकानों के बाहर महिलाओं ने धरना शुरू किया, जो पूरी रात चलता रहा। सुबह होते-होते आंदोलन और तेज हो गया। महिलाएं बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर सड़कों पर उतर आईं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं।
गुस्साए ग्रामीणों ने सड़कों पर जाम लगा दिया, जिससे इलाके में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी विभाग ने बिना स्थानीय हालात और सामाजिक प्रभाव का आकलन किए ही दुकानों का टेंडर जारी कर दिया।
चार दिनों से चल रहे इस विरोध के बीच बुधवार रात एक नई आशंका ने आंदोलन को और तेज कर दिया। ग्रामीणों को खबर मिली कि देर रात शराब का स्टॉक उतारा जा सकता है। इसके बाद महिलाएं और सतर्क हो गईं और बज़ून में देर रात तक धरने पर डटी रहीं, ताकि किसी भी हालत में दुकान शुरू न हो सके।
फिलहाल मंगोली, बज़ून और आसपास के गांवों में लगातार लोग इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। महिलाओं ने साफ कर दिया है कि जब तक शराब की दुकानों का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।